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धारा 2 दहेज प्रतिषेध अधिनियम | 2 Dowry Prohibition Act in hindi

धारा 2 दहेज प्रतिषेध अधिनियम- दहेज” की परिभाषा-

इस अधिनियम में, “दहेज” से कोई ऐसी संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति अभिप्रेत है जो विवाह के समय या उसके पूर्व [या पश्चात्‌ किसी समय] –
(क) विवाह के एक पक्षकार द्वारा विवाह के दूसरे पक्षकार को ; या
(ख) विवाह के किसी भी पक्षकार के माता-पिता द्वारा या किसी अन्य व्यक्ति द्वारा विवाह के किसी भी पक्षकार को या किसी अन्य व्यक्ति को,
[उक्त पक्षकारों के विवाह के संबंध में] या तो प्रत्यक्षतः या अप्रत्यक्षतः दी गई है या दी जाने के लिए करार की गई है, किन्तु उन व्यक्तियों के संबंध में जिन्हें मुस्लिम स्वीय विधि (शरीयत) लागू होती है, मेहर इसके अंतर्गत नहीं है।

स्पष्टीकरण:- “मूल्यबान प्रतिभूति” का वही अर्थ है जो भारतीय दंड संहिता 1890 का 45 की धारा 30 में है |


2 Dowry Prohibition Act- Definition of “dowry”

In this Act, “dowry” means any property or valuable security given or
agreed to be given either directly or indirectly—
(a) by one party to a marriage to the other party to the marriage; or
(b) by the parents of either party to a marriage or by any other person, to either party to the marriage or to any other person;
at or before [or any time after the marriage] [in connection with the marriage of the said parties, but does not include] dower or mahr in the case of persons to whom the Muslim Personal Law (Shariat) applies.

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