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धारा 33 विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप अधिनियम | धारा 33 यूएपीए एक्ट | Section 33 UAPA Act in hindi

धारा 33 यूएपीए एक्ट — कतिपय व्यक्तियों की संपत्ति का समपहरण-

(1) जहां कोई व्यक्ति, अध्याय 4 या अध्याय 6 के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त है, वहां न्यायालय ऐसा कोई आदेश पारित करने के लिए स्वतंत्र होगा कि उसकी जंगम या स्थावर या दोनों प्रकार की सभी या उनमें से कोई संपत्ति, यदि इस अध्याय के अधीन पहले ही कुर्क नहीं की गई है तो ऐसे विचारण के दौरान कुर्क कर ली जाएं ।

(2) जहां किसी व्यक्ति को अध्याय 4 या अध्याय 6 के अधीन दंडनीय किसी अपराध या सिद्धदोष ठहराया गया है, वहां न्यायालय, कोई दंड देने के अतिरिक्त, लिखित में आदेश द्वारा यह घोषित कर सकेगा कि अभियुक्त की, जंगम या स्थावर या दोनों प्रकार की कोई संपत्ति, जो आदेश में विनिर्दिष्ट हो, सभी विल्लंगमों से मुक्त रूप में, यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार को समपहृत हो जाएगी ।

(3) जहां कोई व्यक्ति उच्च क्वालिटी की कूटकृत भारतीय करेंसी से संबंधित किसी अपराध का अभियुक्त है, वहां न्यायालय अपराध में अंतर्वलित उच्च क्वालिटी की कूटकृत भारतीय करेंसी के मूल्य के, जिसके अंतर्गत ऐसी करेंसी का अंकित मूल्य भी है; जो उच्च क्वालिटी का होने के रूप में परिभाषित नहीं है, किंतु जो उच्च क्वालिटी की कूटकृत भारतीय करेंसी के साथ सामान्य अभिग्रहण के भागरूप है, समतुल्य संपत्ति की, यथास्थिति, कुर्की करने या उसका समपहरण करने का निदेश देने संबंधी आदेश पारित कर सकेगा ।

(4) जहां कोई व्यक्ति, अध्याय 4 या अध्याय 6 के अधीन दंडनीय किसी अपराध का अभियुक्त है, वहां न्यायालय अपराध में अंतर्वलित आतंकवाद के आगमों के मूल्य के समतुल्य संपत्ति की, यथास्थिति, कुर्की करने या उसका समपहरण करने का निदेश देने संबंधी आदेश पारित कर सकेगा ।

(5) जहां कोई व्यक्ति, अध्याय 4 या अध्याय 6 के अधीन किसी अपराध का अभियुक्त है, वहां न्यायालय इस आशय का आदेश पारित करने के लिए स्वतंत्र होगा कि उसकी जंगम या स्थावर या दोनों प्रकार की सभी संपत्ति का या उनमें से किसी का, जहां इस अधिनियम के अधीन विचारण अभियुक्त की मृत्यु के कारण या उसे उद्घोषित अपराधी घोषित कर दिए जाने के कारण या किसी अन्य कारणवश समाप्त नहीं हो सकता, न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत तात्त्विक साक्ष्य के आधार पर अधिहरण कर लिया जाए ।


Section 33 UAPA Act —  Forfeiture of property of certain persons.

(1) Where any person is accused of an offence under Chapter IV or Chapter VI, it shall be open to the court to pass an order that all or any of the properties, movable or immovable or both, belonging to him, shall, during the period of such trial, be attached, if not already attached under this Chapter.


(2) Where a person has been convicted of any offence punishable under Chapter IV or Chapter VI, the court may, in addition to awarding any punishment, by order in writing, declare that any property, movable or immovable or both, belonging to the accused and specified in the order, shall stand forfeited to the Central Government or the State Government, as the case may be, free from all encumbrances.


1[(3) Where any person is accused of an offence concerning high quality counterfeit Indian currency, the court may pass an order directing attachment or forfeiture, as the case may be, of property equivalent to the value of such high quality counterfeit Indian currency involved in the offence including the face value of such currency which are not defined to be of high quality, but are part of the common seizure along with the high quality counterfeit Indian currency. धारा 33 यूएपीए एक्ट


(4) Where a person is accused of an offence punishable under Chapter IV or Chapter VI, the court may pass an order directing attachment or forfeiture, as the case may be, of property equivalent to or the value of the proceeds of terrorism involved in the offence. धारा 33 यूएपीए एक्ट


(5) Where any person is accused of an offence under Chapter IV or Chapter VI, it shall be open to the court to pass an order that all or any of the property, movable or immovable or both, belonging to him shall, where the trial under the Act cannot be concluded on account of the death of the accused or being declared a proclaimed offender or for any other reason, be confiscated on the basis of material evidence produced before the court.]

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