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धारा 7 परिसीमा अधिनियम | धारा 7 लिमिटेशन एक्ट | Section 7 Limitation Act in hindi

धारा 7 परिसीमा अधिनियम — कई व्यक्तियों में से एक की निर्योग्यता-

जहां कि वाद संस्थित करने या डिक्री के निष्पादन के लिए आवेदन करने के लिए संयुक्ततः हकदार व्यक्तियों में से कोई एक ऐसी किसी निर्योग्यता के अधीन हो और उस व्यक्ति की सहमति के बिना उन्मोचन दिया जा सकता हो, वहां उन सबके विरुद्ध समय का चलना आरम्भ हो जाएगा, किन्तु जहां कि ऐसा उन्मोचन न दिया जा सकता हो वहां उनमें से किसी के भी विरुद्ध तब तक समय का चलना आरम्भ न होगा जब तक उनमें से कोई एक अन्यों की सहमति के बिना ऐसा उन्मोचन देने के लिए समर्थ न हो जाए या उस निर्योग्यता का अन्त न हो जाए ।

स्पष्टीकरण 1- यह धारा हर प्रकार के दायित्व से, जिसके अन्तर्गत स्थावर सम्पत्ति संबंधी दायित्व आता है, उन्मोचन को लागू होती है ।

स्पष्टीकरण 2- मिताक्षरा विधि द्वारा शासित हिन्दू अविभक्त कुटुम्ब का कर्ता कुटुम्ब के अन्य सदस्यों की सहमति के बिना इस धारा के प्रयोजनों के लिए उन्मोचन देने के लिए समर्थ केवल तब समझा जाएगा जबकि वह अविभक्त कुटुम्ब की सम्पत्ति का प्रबंध करता हो ।

Section 7 Limitation Act — Disability of one of several persons–

Where one of several persons jointly entitled to institute a suit or make an application for the execution of a decree is under any such disability, and a discharge can be given without the concurrence of such person, time will run against them all; but, where no such discharge can be given, time will not run as against any of them until one of them becomes capable of giving such discharge without the concurrence of the others or until the disability has ceased.

Explanation I.—This section applies to a discharge from every kind of liability, including a liability in respect of any immovable property.

Explanation II.—For the purposes of this section, the Manager of a Hindu undivided family governed by the Mitakshara law shall be deemed to be capable of giving a discharge without the concurrence of the other members of the family only if he is in management of the joint family property.

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