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संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 62 | Section 62 TPA in hindi

संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 62 – कब्जा प्रत्युद्धरण का भोग-बंधककर्ता का अधिकार-

भोग-बंधक की दशा में बंधककर्ता को यह अधिकार है कि वह बंधक विलेख और बंधक-सम्पत्ति संबंधी सब दस्तावेजों के सहित, जो बंधकदार के कब्जे या शक्ति में हों, उस सम्पत्ति के कब्जे का प्रत्युद्धरण कर ले-

(क) जहां कि बंधकदार सम्पत्ति के भाटकों और लाभों के बंधक धन का भुगतान स्वयं कर लेने के लिए प्राधिकृत है वहाँ तब जब ऐसे धन का भुगतान हो गया हो,

(ख) जहां कि बंधकदार ऐसे भाटकों और लाभों से या उनके किसी भाग से बंधक धन के केवल किसी भाग का भुगतान स्वयं कर लेने के लिए प्राधिकृत है, वहां तब जब बंधक धन के संदाय के लिए विहित कालावधि का (यदि कोई हो) अवसान हो गया हो और बंधककर्ता बंधक धन या उसका कोई अतिशेष बंधकदारों को दे दे या निविदत्त कर दे या जैसा कि एतस्मिन्पश्चात् उपबन्धित है, न्यायालय में निक्षिप्त कर दे।


Section 62 TPA – Right at usufructuary mortgagor to recover possession-

In the case of a usufructuary mortgage, the mortgagor has a right to recover possession of the property 1[together with the mortgage-deed and all documents relating to the mortgaged property which are in the possession or power of the mortgagee].–

(a) where the mortgagee is authorised to pay himself the mortgage-money] from the rents and profits of the property.–when such money is paid:

(b) where the mortgagee is authorised to pay himself from such rents and profits 2[or arty part thereof a part only of the mortgage -money,]–.when the term (if any), prescribed for the payment of the mortgage-money has expired and the mortgagor pays or tenders to the mortgagee 3[the mortgage-money or the balance thereof] or deposits it in Court as hereinafter provided.


1. Ins. by s. 25, ibid.
2. Subs. by s. 25, ibid., for “the interest of the principal money”.
3. Subs. by s. 25, ibid., for “the principal money”.

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