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संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 63A | Section 63A TPA in hindi

संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 63A – बंधक-संपत्ति में अभिवद्धि-

(1) जहां कि बन्धकदार के कब्जे में की बन्धक-सम्पत्ति में अभिवृद्धि बन्धक के चालू रहने के दौरान की गई है, वहाँ मोचन पर बन्धककर्ता तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो अभिवृद्धि का हकदार होगा और बन्धकर्ता केवल उपधारा (2) में उपबन्धित मामलों को छोड़कर उसका खर्चा देने का दायी न होगा।

(2) जहां कि कोई ऐसी अभिवृद्धि बन्धकदार के खर्च पर की गई थी और सम्पत्ति को नाश या क्षय से परिरक्षित करने के लिए आवश्यक थी या प्रतिभूति को अपर्याप्त होने से रोकने के लिए आवश्यक थी, या किसी लोक सेवक या लोक प्राधिकारी के विधिपूर्ण आदेश के अनुपालन में की गई थी, वहां तत्प्रतिकूल संविदा न हो तो बन्धककर्ता दायी होगा कि अभिवृद्धि के उचित खर्चों को उसी दर से ब्याज सहित, जो मूलधन पर देय है, या जहां कि कोई ऐसी दर नियत नहीं है वहां नौ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज सहित मूलधन में जोड़कर दे तथा उस अभिवृद्धि के कारण प्रोद्भवमान लाभ, यदि कोई हों, बन्धकर्ता के नाम जमा किए जाएंगे।


Section 63A TPA – 1[Improvements to mortgaged property.

(1) Where mortgaged property in possession of the mortgagee has, during the continuance of the mortgage, been improved, the mortgagor, upon redemption, shall, in the absence of a contract to the contrary, be entitled to the improvement; and the mortgagor shall not, save only in cases provided for in sub-section (2), be liable to pay the cost thereof. संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 63(A)

(2) Where any such improvement was effected at the cost of the mortgagee and was necessary to preserve the property from destruction or deterioration or was necessary to prevent the security from becoming insufficient, or was made in compliance with the lawful order of any public servant or public authority, the mortgagor shall, in the absence of a contract to the contrary, be liable to, pay the proper cost thereof as an addition to the principal money with interest at the same rate as is payable on the principal, or, where no such rate is fixed, at the rate of nine per cent. per annum, and the profits, if any, accruing by reason of the improvement shall be credited to the mortgagor.]


1. Ins. by s. 27, ibid.

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