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संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 92 | Section 92 TPA in hindi

संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 92 – प्रत्यासन-

धारा 91 में निर्दिष्ट व्यक्तियों में से (बन्धककर्ता से भिन्न) कोई भी, और कोई भी सहबन्धककर्ता, उस सम्पत्ति का, जो बन्धक के अध्यधीन है, मोचन कराने पर वहां तक, जहां तक कि ऐसी सम्पत्ति के मोचन, पुरोवन्ध या विक्रय का सम्बन्ध है, वे ही अधिकार रखेगा जिन्हें बन्धककर्ता के या किसी अन्य बन्धकदार के विरुद्ध वह बन्धकदार रखता हो जिसके बन्धक का वह मोचन कराता।

इस धारा द्वारा प्रदत्त अधिकार प्रत्यासन-अधिकार कहलाता है तथा जो व्यक्ति उसे अर्जित करता है, वह उस बन्धकदार के अधिकारों में प्रत्यासीन हुआ कहलाता है जिसके बन्धक का वह मोचन कराता है।

वह व्यक्ति, जिसने बन्धककर्ता को वह धन उधार दिया है, जिससे बन्धक का मोचन हुआ है, उस बन्धकदार के अधिकारों में प्रत्यासीन हो जाएगा जिसके बन्धक का मोचन कराया गया है यदि बन्धककर्ता ने रजिस्ट्रीकृत लिखत द्वारा यह करार किया हो कि ऐसा व्यक्ति ऐसे प्रत्यासीन हो जाएगा।

इस धारा की कोई भी बात किसी भी व्यक्ति को प्रत्यासन का अधिकार प्रदान करने वाली न समझी जाएगी, जब तक कि उस बन्धक का, जिसके बारे में इस अधिकार का दावा किया जाता है मोचन पूर्णतः न करा लिया गया हो।


Section 92 TPA 1[Subrogation.

Any of the persons referred to in section 91 (other than the mortgagor) and any co-mortgagor shall, on redeeming property subject to the mortgage, have, so far as regards redemption, foreclosure or sale of such property, the same rights as the mortgagee whose mortgage he redeems may have against the mortgagor or any other mortgagee.

The right conferred by this section is called the right of subrogation, and a person acquiring the same is said to be subrogated to the rights of the mortgagee whose mortgage he redeems. संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 92

A person who has advanced to a mortgagor money with which the mortgage has been redeemed shall be subrogated to the rights of the mortgagee whose mortgage has been redeemed, if the mortgagor has by a registered instrument agreed that such persons shall be so subrogated. संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 92

Nothing in this section shall be deemed to confer a right of subrogation on any person unless the mortgage in respect of which the right is claimed has been redeemed in full.]


1. Ins. by s. 47, ibid. Original s. 92 to 94 were rep. by Act 5 of 1908, s. 156 and the fifth Schedule.

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