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संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 100 | Section 100 TPA in hindi

संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 100 – भार–

जहां कि एक व्यक्ति की स्थावर सम्पत्ति पक्षकारों के कार्य द्वारा या विधि की क्रिया द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को धन के संदाय के लिए प्रतिभूति बन जाती है और वह संव्यवहार बन्धक की कोटि में नहीं आता, वहां यह कहा जाता है कि पश्चात्-कथित व्यक्ति का उस सम्पत्ति पर भार है और एतस्मिन्पूर्व अन्तर्विष्ट वे सब उपबन्ध, जो सादा बन्धक को लागू होते हैं, ऐसे भार को यावत्शक्य लागू होंगे।

न्यास के निष्पादन में उचित रूप से किए गए व्ययों के लिए जो भार न्यासधारी का न्यस्त सम्पत्ति पर होता है उसे इस धारा की कोई भी बात लागू नहीं है और किसी तत्समय-प्रवृत्त-विधि द्वारा अन्यथा अभिव्यक्ततः उपबन्धित को छोड़कर कोई भी भार उस सम्पत्ति के विरुद्ध प्रवर्तित न किया जाएगा, जो ऐसे व्यक्ति के हस्तगत हो जिसे ऐसी सम्पत्ति प्रतिफलार्थ और उस भार की सूचना के बिना अन्तरित की गई है।


Section 100 TPA – Charges –

Where immovable property of one person is by act of parties or operation of law made security for the payment of money to another, and the transaction does not amount to a mortgage, the latter person is said to have a charge on the property; and all the provisions hereinbefore contained 1[which apply to a simple mortgage shall, so far as may be, apply to such charge].

Nothing in this section applies to the charge of a trustee on the trust property for expenses properly incurred in the execution of his trust, 2[and, save as otherwise expressly provided by any law for the time being in force, no charge shall be enforced against any property in the hands of a person to whom such property has been transferred for consideration and without notice of the charge.]


1. Subs. by Act 20 of 1929, s 50, for certain words.

2. Added by s. 50, ibid.

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