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दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 291A | सीआरपीसी की धारा 291A | Section 291A CrPC in hindi

सीआरपीसी की धारा 291A — मजिस्ट्रेट की शिनाख्त रिपोर्ट — 

(1) कोई दस्तावेज, जिसका किसी व्यक्ति या सम्पत्ति के संबंध में किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट की स्वहस्ताक्षरित शिनाख्त रिपोर्ट होना तात्पर्यत है, इस संहिता के अधीन किसी जांच, विचारण या अन्य कार्यवाही में साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाया जा सकेगा, यद्यपि ऐसे मजिस्ट्रेट को साक्षी के तौर पर नहीं बुलाया गया है :

परन्तु जहाँ ऐसी रिपोर्ट में ऐसे, किसी संदिग्ध व्यक्ति या साक्षी का विवरण है, जिसे भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (1872 का 1) की, यथास्थिति, धारा 21, धारा 32, धारा 33, धारा 155 या धारा 157 के उपबन्ध, लागू होते हैं, वहाँ, ऐसा विवरण इस उपधारा के अधीन, उन धाराओं के उपबन्धों के अनुसार के सिवाय, उपयोग में नहीं लाया जाएगा।

(2) न्यायालय, यदि वह ठीक समझता है और अभियोजन या अभियुक्त के आवेदन पर ऐसे मजिस्ट्रेट को समन कर सकेगा और उक्त रिपोर्ट की विषयवस्तु के बारे में उसकी परीक्षा कर सकेगा और करेगा ।


Section 291A CrPC — Identification report of Magistrate – 

(1) Any document purporting to be a report of identification under the hand of an Executive Magistrate in respect of a person or property may be used as evidence in any inquiry, trial or other proceeding under this Code, although such Magistrate is not called as a witness:

Provided that where such report contains a statement of any suspect or witness to which the provisions of section 21, section 32, section 33, section 155 or section 157, as the case may be, of the Indian Evidence Act, 1872 (1 of 1872), apply, such statement shall not be used under this sub-section except in accordance with the provisions of those sections.

(2) The Court may, if it thinks fit, and shall, on the application of the prosecution or of the accused, summon and examine such Magistrate as to the subject-matter of the said report.

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