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धारा 16 बाल-विवाह प्रतिषेध अधिनियम | 16 Prohibition of Child Marriage Act in hindi

धारा 16 बाल-विवाह प्रतिषेध अधिनियम – बाल-विवाह प्रतिषेध अधिकारी-

(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, संपूर्ण राज्य या उसके ऐसे भाग के लिए, जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, बाल-विवाह प्रतिषेध अधिकारी के नाम से ज्ञात, किसी अधिकारी या अधिकारियों की नियुक्ति करेगी, जिसकी अधिकारिता, अधिसूचना में विनिर्दिष्ट क्षेत्र या क्षेत्रों पर होगी ।

(2) राज्य सरकार, समाज सेवा में विख्यात किसी स्थानीय सम्मानीय सदस्य या ग्राम पंचायत या नगरपालिका के किसी अधिकारी से या सरकार के अथवा किसी पब्लिक सेक्टर के उपक्रम के किसी अधिकारी से या किसी गैर-सरकारी संगठन के किसी पदाधिकारी से बाल-विवाह प्रतिषेध अधिकारी की सहायता करने के लिए अनुरोध कर सकेगी और, यथास्थिति, ऐसा सदस्य, अधिकारी या पदाधिकारी तद्नुसार कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा ।

(3) बाल-विवाह प्रतिषेध अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह-

(क) बाल-विवाहों के अनुष्ठापन का ऐसी कार्रवाई करके, जो वह उचित समझे निवारण करे;

(ख) इस अधिनियम के उपबंधों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के प्रभावी अभियोजन के लिए साक्ष्य संग्रह करे;

(ग) बाल-विवाह के अनुष्ठापन का संवर्धन करने, सहायता देने या होने देने में अन्तर्वलित न होने के लिए व्यष्टिक मामलों में सलाह दे या क्षेत्र के निवासियों को साधारणतया परामर्श दे;

(घ) बाल-विवाह के परिणामस्वरूप होने वाली बुराई के प्रति जागृति पैदा करे;

(ङ) बाल-विवाहों के मुद्दे पर समाज को सुग्राही बनाए;

(च) ऐसी नियतकालिक विवरणियां और आंकड़े दे, जो राज्य सरकार निर्देशित करे; और

(छ) ऐसे अन्य कृत्यों और कर्तव्यों का निवर्हन करे, जो राज्य सरकार द्वारा उसे समनुदेशित किए जाएं ।

(4) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, बाल-विवाह प्रतिषेध अधिकारी को किसी पुलिस अधिकारी की ऐसी शक्तियां विनिहित कर सकेगी जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं और बाल-विवाह प्रतिषेध अधिकारी ऐसी शक्तियों का, ऐसी शर्तों और परिसीमाओं के अधीन रहते हुए, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाएं, प्रयोग करेगा ।

(5) बाल-विवाह प्रतिषेध अधिकारी को धारा 4, धारा 5 और धारा 13 के अधीन और धारा 3 के अधीन बालक के साथ आदेश के लिए न्यायालय को आवेदन करने की शक्ति होगी ।


16 Prohibition of Child Marriage Act – Child Marriage Prohibition Officers-

(1) The State Government shall, by notification in the Official Gazette, appoint for the whole State, or such part thereof as may be specified in that notification, an officer or officers to be known as the Child Marriage Prohibition Officer having jurisdiction over the area or areas specified in the notification.

(2) The State Government may also request a respectable member of the locality with a record of social service or an officer of the Gram Panchayat or Municipality or an officer of the Government or any public sector undertaking or an office bearer of any non-governmental organisation to assist the Child Marriage Prohibition Officer and such member, officer or office bearer, as the case may be, shall be bound to act accordingly.

(3) It shall be the duty of the Child Marriage Prohibition Officer–

(a) to prevent solemnisation of child marriages by taking such action as he may deem fit;

(b) to collect evidence for the effective prosecution of persons contravening the provisions of this Act;

(c) to advise either individual cases or counsel the residents of the locality generally not to indulge in promoting, helping, aiding or allowing the solemnisation of child marriages; धारा 16 बाल-विवाह प्रतिषेध अधिनियम

(d) to create awareness of the evil which results from child marriages;

(e) to sensitize the community on the issue of child marriages;

(f) to furnish such periodical returns and statistics as the State Government may direct; and

(g) to discharge such other functions and duties as may be assigned to him by the State Government. धारा 16 बाल-विवाह प्रतिषेध अधिनियम

(4) The State Government may, by notification in the Official Gazette, subject to such conditions and limitations, invest the Child Marriage Prohibition Officer with such powers of a police officer as may be specified in the notification and the Child Marriage Prohibition Officer shall exercise such powers subject to such conditions and limitations, as may be specified in the notification. धारा 16 बाल-विवाह प्रतिषेध अधिनियम

(5) The Child Marriage Prohibition Officer shall have the power to move the Court for an order under sections 4, 5 and 13 and along with the child under section 3.

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