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धारा 22C विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप अधिनियम | धारा 22C यूएपीए एक्ट | Section 22C UAPA Act in hindi

धारा 22C यूएपीए एक्ट — कंपनियों, सोसाइटियों या न्यासों द्वारा अपराधों के लिए दंड-

जहां इस अधिनियम के अधीन कोई अपराध, यथास्थिति, किसी कंपनी या किसी सोसाइटी या किसी न्यास द्वारा किया गया है, वहां ऐसा प्रत्येक व्यक्ति (जिसके अंतर्गत कंपनी या न्यास का संप्रवर्तक या न्यास का व्यवस्थापक भी है), जो उस अपराध के समय कारबार के संचालन के लिए भारसाधक या उसके प्रति उत्तरदायी था, ऐसी अवधि के कारावास के लिए, जो सात वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने के लिए भी, जो पांच करोड़ रुपए से कम का नहीं होगा और जो दस करोड़ रुपए तक का हो सकेगा, दायी होगा ।


Section 22C UAPA Act — Punishment for offences by companies, societies or trusts.—

Where any offence under the Act has been committed by a company or a society or a trust, as the case may be, every person (including promoter of company or trust or settlor of the trust) who at the time of the offence was either in charge or responsible for the conduct of the business shall be punishable with imprisonment for a term which shall not be less than seven years but which may extend to imprisonment for life and shall also be liable with fine which shall not be less than five crore rupees and which may extend to ten crore rupees.]


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