Bare Acts

IPC की धारा 7 | धारा 7 भारतीय दण्ड संहिता | IPC Section 7 In Hindi

IPC की धारा 7 — एक बार स्पष्टीकॄत पद का भाव —

भारतीय दंड संहिता की धारा 7 के अनुसार, हर पद, जिसका स्पष्टीकरण इस संहिता के किसी भाग में किया गया है, इस संहिता के हर भाग में उस स्पष्टीकरण के अनुरूप ही प्रयोग किया गया है।


IPC की धारा 7 से संबंधित महत्वपूर्ण केस

फतेह चन्द बनाम सम्राट, 44 कल0 477 (एफ) बी 
निर्वचन के लिए सम्पूर्ण विधि एक साथ दृष्टव्य होगी, इस प्रकार यदि किसी पद का अभिप्राय विधि में एक स्थान पर स्पष्ट कर दिया गया हो, तो हर एक स्थान पर जब भी वह पद आयेगा, सर्वत्र यही अभिप्राय होने का तात्पर्य यह है कि उस अभिप्राय के अतिरिक्त अन्य कोई अभिप्राय उस शब्द के परिप्रेक्ष्य में अंगीकृत नहीं होगा तथा यदि वे अनुरूपीकरण से अभिप्रेत हैं तो वे अपवर्जित माने जायेंगे।

IPC की धारा 7 FAQ

  1. आईपीसी (IPC) की धारा 7 क्या हैं ?

    एक बार स्पष्टीकॄत पद का भाव

  2. आईपीसी (IPC) की धारा 7 क्या कहती हैं ?

    आईपीसी (IPC) की धारा 7 के अनुसार, हर पद, जिसका स्पष्टीकरण इस संहिता के किसी भाग में किया गया है, इस संहिता के हर भाग में उस स्पष्टीकरण के अनुरूप ही प्रयोग किया गया है।

  3. IPC की धारा 7 में स्पष्टीकृत पद का क्या भाव है?

    लैटिन सूक्ति- “Express io unius est exclusio alterius” पर आधारित भाव है-” एक का उल्लेख दूसरे का अपवर्जन है।

IPC Section 7 — Sense of expression once explained —

Every expression which is explained in any part of this Code, is used in every part of this Code in conformity with the explanation.

भारतीय दण्ड संहिता के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकें –

भारतीय दंड संहिता,1860 – प्रो सूर्य नारायण मिश्र

भारतीय दंड संहिता, 1860 – डॉ. बसंती लाल

भारतीय दण्ड संहिता ( DIGLOT) [ENGLISH/HINDI] [BARE ACT]

IPC की धारा 7 7 IPC IN HINDI 7 IPC IN HINDI 7 IPC IN HINDI