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धारा 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम | Section 13 prevention of corruption act in hindi | Section 13 PC Act in hindi

धारा 13 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम — लोक सेवक द्वारा आपराधिक अवचार.–

(1) कोई लोक सेवक आपराधिक अवचार का अपराध करने वाला कहा जाएगा.

(क) यदि वह लोक सेवक के रूप में अपने को सौंपी गई किसी संपत्ति या अपने नियंत्रणाधीन किसी संपत्ति का अपने उपयोग के लिए बेइमानी से या कपटपूर्वक दुर्विनियोग करता है या उसे अन्यथा संपरिवर्तित कर लेता है या किसी अन्य व्यक्ति को ऐसा करने देता है; या

(ख) यदि वह अपनी पदावधि के दौरान अवैध रूप से अपने आशय को समृद्ध करता है|

स्पष्टीकरण 1. किसी व्यक्ति के बारे में यह उपधारणा की जाएगी कि उसने अवैध रूप से अपने को साक्ष्य समृद्ध बनाया है, यदि वह या उसकी ओर से कोई अन्य व्यक्ति अपनी पदावधि के दौरान किसी समय अपनी आय के ज्ञात स्त्रोतों से अननुपातिक घनीय संसाधन या संपत्ति उसके कब्जे में है या रही है, जिसके लिए लोक सेवक समाधानप्रद रूप से हिसाब नहीं दे सकता है ।

स्पष्टीकरण 2. पद आय के ज्ञात स्त्रोत से किसी विधिपूर्ण स्त्रोत से प्राप्त आय अभिप्रेत है ।

(2) कोई लोक सेवक जो आपराधिक अवचार करेगा ऐसे अवधि के करावास से दण्डित किया जायेगा जो चार वर्ष से कम की नही होगी किन्तु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी और जुर्माने से भी दंडनीय किया जायेगा |  


section 13 prevention of corruption act — Criminal misconduct by a public servant —

[(1) A public servant is said to commit the offence of criminal misconduct,–

(a) if he dishonestly or fraudulently misappropriates or otherwise converts for his own use any property entrusted to him or any property under his control as a public servant or allows any other person so to do; or

(b) if he intentionally enriches himself illicitly during the period of his office.

Explanation 1.–A person shall be presumed to have intentionally enriched himself illicitly if he or any person on his behalf, is in possession of or has, at any time during the period of his office, been in possession of pecuniary resources or property disproportionate to his known sources of income which the public servant cannot satisfactorily account for.

Explanation 2.–The expression ”known sources of income” means income received from any lawful sources.]

(2) Any public servant who commits criminal misconduct shall be punishable with imprisonment for a term which shall be not less than 2[four years] but which may extend to 3[ten years] and shall also be liable to fine.

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