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मोटर यान अधिनियम की धारा 35 | 35 MV Act in hindi

मोटर यान अधिनियम की धारा 35 — न्यायालय की निरर्हित करने की शक्ति —

(1) जब कंडक्टर अनुज्ञप्ति को धारण करने वाला कोई व्यक्ति इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया है, तब वह न्यायालय, जिसने उसे दोषसिद्ध किया है, विधि द्वारा प्राधिकृत कोई अन्य दंड अधिरोपित करने के अतिरिक्त, उस व्यक्ति को, जो इस प्रकार दोषसिद्ध किया गया है, कोई कंडक्टर अनुज्ञप्ति धारण करने से उतनी अवधि के लिए, जितनी वह न्यायालय विनिर्दिष्ट करे, निरर्ह घोषित कर सकेगा ।

(2) वह न्यायालय जिसमें इस अधिनियम के अधीन अपराध के लिए हुई किसी दोषसिद्धि की अपील होती है, निचले न्यायालय द्वारा दिए गए निरर्हता के किसी आदेश को अपास्त कर सकेगा या उसमें परिवर्तन कर सकेगा, और वह न्यायालय, जिसमें मामूली तौर पर ऐसे न्यायालय से अपीलें होती हैं, उस न्यायालय द्वारा दिए गए निरर्हता के किसी आदेश को इस बात के होते हुए भी अपास्त कर सकेगा या उसमें परिवर्तन कर सकेगा कि उस दोषसिद्धि के विरुद्ध कोई अपील नहीं होती जिसके संबंध में वह आदेश दिया गया था ।


35 MV Act — Power of Court to disqualify —

(1) Where any person holding a conductor’s licence is convicted of an offence under this Act, the Court by which such person is convicted may, in addition to imposing any other punishment authorised by law, declare the person so convicted to be disqualified for such period as the Court may specify for holding a conductor’s licence.

(2) The Court to which an appeal lies from any conviction of an offence under this Act may set aside or vary any order of disqualification made by the Court below, and the Court to which appeals ordinarily lie from such Court, may set aside or vary any order of disqualification made by that Court, notwithstanding that no appeal lies against the conviction in connection with which such order was made.

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