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IPC की धारा 106 | धारा 106 भारतीय दण्ड संहिता | IPC Section 106 In Hindi

IPC की धारा 106 — घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जबकि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है –

जिस हमले से मृत्यु की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित होती है उसके विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग करने में यदि प्रतिरक्षक ऐसी स्थिति में हो कि निर्दोष व्यक्ति की अपहानि की जोखिम के बिना वह उस अधिकार का प्रयोग कार्यसाधक रूप से न कर सकता हो तो उसके प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार वह जोखिम उठाने तक का है।

दृष्टांत

क, पर एक भीड़ द्वारा आक्रमण किया जाता है, जो उसकी हत्या करने का प्रयत्न करती है। वह उस भीड़ पर गोली चलाए बिना प्राइवेट प्रतिरक्षा के अपने अधिकार का प्रयोग कार्यसाधक रूप से नहीं कर सकता, और वह भीड़ में मिले हुए छोटे-छोटे शिशुओं को अपहानि करने की जोखिम उठाए बिना गोली नहीं चला सकता। यदि वह इस प्रकार गोली चलाने से उन शिशुओं में से किसी शिशु को अपहानि करे तो क कोई अपराध नहीं करता।

धारा 106 आईपीसी के प्रमुख अवयव क्या हैं?
प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग में –
1. हमले से मृत्यु की आशंका युक्तियुक्त रूप से कारित होनी चाहिये ,
2. प्रतिरक्षक ऐसी स्थिति में हो कि निर्दोष व्यक्ति की अपहानि की जोखिम के बिना वह उस अधिकार का प्रयोग कार्यसाधक रूप से न कर सके ,
3. तो उसके प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का विस्तार वह जोखिम उठाने तक का है।

IPC की धारा 106 से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य –

यह धारा यह उद्घोषित करती है कि वैयक्तिक प्रतिरक्षा के अधिकार का उपयोग करते हुये कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में निर्दोष व्यक्तियों को अपहानि कारित की जा सकती है।
यह धारा केवल उन्हीं मामलों में लागू मानी जायेगी जिसमें कि मृत्यु या घोर उपहति की युक्तियुक्त आशंका न हो। इस धारा के लागू होने में निर्दोष व्यक्ति को पहुँचायी गयी अपहानि का हर स्थिति में अनिवार्य होना आवश्यक है।

IPC की धारा 106 FAQ

  1. IPC की धारा 106 क्या है? 

    IPC की धारा 106 — घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जबकि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है

  2. घातक हमले के विरुद्ध प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार जबकि निर्दोष व्यक्ति को अपहानि होने की जोखिम है आईपीसी की किस धारा में दिया गया है ?

    आईपीसी (IPC) की धारा 106 में

  3. क्या प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार में निर्दोष व्यक्ति को अपहानि की जा सकती है ?

    हाँ , वैयक्तिक प्रतिरक्षा के अधिकार का उपयोग करते हुये कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में निर्दोष व्यक्तियों को अपहानि कारित की जा सकती है।

  4. आईपीसी की धारा 106 किन मामलों में लागू होगी

    आईपीसी की धारा 106 का प्रवर्तन केवल उन्हीं मामलों में होता है जिसमें मृत्यु की युक्तियुक्त आशंका न हो, न कि घोर उपहति की ।

IPC Section 106 — Right of private defence against deadly assault when there is risk of harm to innocent person –

If in the exercise of the right of private defence against an assault which reasonably causes the apprehension of death, the defender be so situated that he cannot effectually exercise that right without risk of harm to an innocent person, his right of private defence extends to the running of that risk.

Illustration –

POSTA is attacked by a mob who attempt to murder him. He cannot effectually exercise his right of private defence without firing on the mob, and he cannot fire without risk of harming young children who are mingled with the mob. A commits no offence if by so firing he harms any of the children.

भारतीय दण्ड संहिता के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकें –

1.भारतीय दंड संहिता,1860 – प्रो सूर्य नारायण मिश्र

2.भारतीय दंड संहिता, 1860 – डॉ. बसंती लाल

3.भारतीय दण्ड संहिता ( DIGLOT) [ENGLISH/HINDI] [BARE ACT]

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