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IPC की धारा 68 | धारा 68 भारतीय दण्ड संहिता | 68 IPC In Hindi

IPC की धारा 68 (DHARA 68) — जुर्माना देने पर कारावास का पर्यवसान हो जाना –

जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए अधिरोपित कारावास तब पर्यवसित हो जाएगा, जब वह जुर्माना या तो चुका दिया जाए या विधि की प्रक्रिया द्वारा उद्गृहीत कर लिया जाए।


आईपीसी (IPC) की धारा 68 के प्रमुख अवयव क्या हैं ?
1. जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा में .
2. अधिरोपित कारावास तब पर्यवसित हो जाएगा,
3. जब वह जुर्माना या तो चुका दिया जाए या
4. विधि की प्रक्रिया द्वारा उद्गृहीत कर लिया जाए।

IPC की धारा 68 से संबंधित महत्वपूर्ण केस –

स्टेट बनाम श्री वीर बहादुर सिंह, 2005 क्रि० लॉ ज0 4346 (गौहाटी)
यदि सिद्धदोषी उपबंधित कालावधि के परे उस अधिरोपित जुर्माने को जमा करने का प्रस्ताव करता है तो न्यायालय उसको स्वीकार करने से इंकार नहीं कर सकता है और ऐसे प्रकृति के मामले में आईपीसी की धारा 68 एवं 69 के उपबंधों को अवश्य लागू किया जाना चाहिए और न्यायालय ऐसी स्थिति में धारा 324 दण्ड प्रक्रिया संहिता के उपबंधों को लागू नहीं कर सकता है।

IPC की धारा 68 FAQ

  1. IPC की धारा 68 (DHARA 68) क्या है ?

    जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए अधिरोपित कारावास तब पर्यवसित हो जाएगा, जब वह जुर्माना या तो चुका दिया जाए या विधि की प्रक्रिया द्वारा उद्गृहीत कर लिया जाए।

  2. IPC की धारा 68 किससे संबंधित है ?

    जुर्माना देने पर कारावास का पर्यवसान हो जाने से

  3. आईपीसी (IPC) की कौन सी धारा जुर्माना देने पर कारावास का पर्यवसान हो जाने से सम्बन्धित है? 

    IPC की धारा 68 (DHARA 68)

68 IPC In Hindi — Imprisonment to terminate on payment of fine –

The imprisonment which is imposed in default of payment of a fine shall terminate whenever that fine is either paid or levied by process of law.

भारतीय दण्ड संहिता के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकें –

भारतीय दंड संहिता,1860 – प्रो सूर्य नारायण मिश्र

भारतीय दंड संहिता, 1860 – डॉ. बसंती लाल

भारतीय दण्ड संहिता ( DIGLOT) [ENGLISH/HINDI] [BARE ACT]

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