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IPC की धारा 70 | धारा 70 भारतीय दण्ड संहिता | 70 IPC In Hindi

IPC की धारा 70 (DHARA 70) — जुर्माने का छह वर्ष के भीतर या कारावास के दौरान में उद्ग्रहणीय होना -संपत्ति को दायित्व से मृत्यु उन्मुक्त नहीं करती –

जुर्माना या उसका कोई भाग, जो चुकाया न गया हो, दण्डादेश दिए जाने के पश्चात् छह वर्ष के भीतर किसी भी समय, और यदि अपराधी दण्डादेश के अधीन छह वर्ष से अधिक के कारावास से दण्डनीय हो तो उस कालावधि के अवसान से पूर्व किसी समय, उद्गृहीत किया जा सकेगा, और अपराधी की मृत्यु किसी भी संपत्ति को, जो उसकी मृत्यु के पश्चात् उसके ऋणों के लिए वैध रूप से दायी हो, इस दायित्व से उन्मुक्त नहीं करता।


IPC की धारा 70 से संबंधित महत्वपूर्ण केस –

चन्द कुमार मित्तर, 23 वी0 रि० क्रि० 256
आईपीसी (IPC) की धारा 70 उस अवधि को विहित करती है जिसके भीतर जुर्माने को उद्गृहीत किया जा सकेगा। जो भी न्यायालय जुर्माने का दण्ड अधिरोपित करता हो वह इस धारा के अधीन जुमनि की वसूली के लिए समर्थ माना जायेगा ।
कलेक्टर आफ बड़ौच बनाम ओछव लाल भीका लाल, 1941 बम्बई 147.
छः साल की अवधि बीतने के पश्चात् सम्पत्ति को बेच कर जुर्माने की वसूली नहीं की जा सकती। 
कृष्णा पिल्लई महादेवन पिल्लई, ए0 आई0 आर0 1953 टी0 सी0 233
अपराधी की मृत्यु की "दशा में जुर्माने के भुगतान के दायित्व में किसी प्रकार की उन्मुक्ति नहीं प्रदान की जायेगी, जुर्माने की वसूली मृतक की सम्पत्ति को जब्त करके की जा सकेगी।
पलक धारी सिंह, ए० आई० आर० 1962 सु० को० 207.
परिसीमा की अवधि विचारण न्यायालय द्वारा डिक्री पारित किये जाने के दिन से आरम्भ हो जाती है न कि अपील या रिवीजन के खारिज होने के दिन से ।
मेहताब सिंह बनाम स्टेट आफ यू0 पी0, 1979 यू0 जे0 (एस0 सी0 ) 146

आईपीसी (IPC) की धारा 
70 केवल मियाद की अवधि के बारे में नियम विहित करती है जुर्माने की वसूली की प्रक्रिया के सम्बन्ध में नहीं, जुर्माने की वसूली की प्रक्रिया के सम्बन्ध में दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 421 तथा 425 के अधीन नियम विहित किया गया है।
पलक धारी सिंह बनाम स्टेट ऑफ यू0 पी0, 1962 (2) क्रि० लॉ ज0 650 
जहाँ पर पंचायत अदालत द्वारा अपराधी पर किसी प्रकार का जुर्माना अधिरोपित किया गया हो तो वहाँ पर IPC की धारा 70(DHARA 70) लागू मानी जायेगी।

IPC की धारा 70 FAQ

  1. IPC की धारा 70 (DHARA 70) क्या है ?

    आईपीसी (IPC) की धारा 70 के अनुसार – जुर्माने का छह वर्ष के भीतर या कारावास के दौरान में उद्ग्रहणीय होना -संपत्ति को दायित्व से मृत्यु उन्मुक्त नहीं करती

  2. जुर्माने का छह वर्ष के भीतर या कारावास के दौरान में उद्ग्रहणीय होना -संपत्ति को दायित्व से मृत्यु उन्मुक्त नहीं करती आईपीसी (IPC) किस धारा में दिया गया है ?

    आईपीसी (IPC) की धारा 70 में |

70 IPC In Hindi — Fine leviable within six years, or during imprisonment-Death not to discharge property from liability —

The fine, or any part thereof which remains unpaid, may be levied at any time within six years after the passing of the sentence, and if, under the sentence, the offender be liable to imprisonment for a longer period than six years, then at any time previous to the expiration of that period; and the death of the offender does not discharge from the liability any property which would, after his death, be legally liable for his debts.

भारतीय दण्ड संहिता के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकें –

भारतीय दंड संहिता,1860 – प्रो सूर्य नारायण मिश्र

भारतीय दंड संहिता, 1860 – डॉ. बसंती लाल

भारतीय दण्ड संहिता ( DIGLOT) [ENGLISH/HINDI] [BARE ACT]

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