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सीआरपीसी की धारा 105I | 105I CrPC in hindi

सीआरपीसी की धारा 105I – समपहरण के बदले जुर्माना-

(1) जहां न्यायालय यह घोषणा करता है कि कोई संपत्ति धारा 105ज के अधीन केंद्रीय सरकार को समपहृत हो गई है और यह ऐसा मामला है जहां ऐसी संपत्ति के केवल कुछ भाग का स्रोत न्यायालय को समाधानप्रद रूप में साबित नहीं किया गया है वहां वह प्रभावित व्यक्ति को, समपहरण के बदले में ऐसे भाग के बाजार मूल्य के बराबर जुर्माने का संदाय करने का विकल्प देते हुए, आदेश देगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन जुर्माना अधिरोपित करने का आदेश देने के पूर्व, प्रभावित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा ।

(3) जहां प्रभावित व्यक्ति, उपधारा (1) के अधीन देय जुर्माने का ऐसे समय के भीतर, जो उस निमित्त अनुज्ञात किया जाए, संदाय कर देता है वहां न्यायालय, आदेश द्वारा, धारा 105ज के अधीन की गई समपहरण की घोषणा का प्रतिसंहरण कर सकेगा और तब ऐसी संपत्ति निर्मुक्त हो जाएगी ।


105I CrPC in hindi – Fine in lieu of forfeiture 

1. Where the Court makes a declaration that any property stands forfeited to the Central Government under section 105H and it is a case where the source of only a part of such property has not been proved to the satisfaction of the Court, it shall make an order giving an option to the person affected to pay, in lieu of forfeiture, a fine equal to the market value of such part.

2. Before making an order imposing a fine under Sub-Section (1), the person affected shall be given a reasonable opportunity of being heard.

3. Where the person affected pays the fine due under Sub-Section (1), within such time as may be allowed in that behalf, the Court may, by order, revoke the declaration of forfeiture under section 105H and thereupon such property shall stand released.

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