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अनैतिक व्यापार अधिनियम की धारा 22A | 22A Immoral Traffic Act In Hindi 

अनैतिक व्यापार अधिनियम की धारा 22A – [विशेष न्यायालयों की स्थापना करने की शक्ति-

(1) यदि राज्य सरकार का समाधान हो जाता है कि किसी जिला या महानगर क्षेत्र में इस अधिनियम के अधीन अपराधों के शीघ्र विचारण का उपबन्ध करने के प्रयोजन के लिए यह आवश्यक है तो वह, शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा और उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात् ऐसे जिला या महानगर क्षेत्र में, यथास्थिति, प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेटों या महानगर मजिस्ट्रेटों के एक या अधिक न्यायालयों की स्थापना कर सकेगी ।

(2) जब तक कि उच्च न्यायालयों द्वारा अन्यथा निदेश न दिया जाए, उपधारा (1) के अधीन स्थापित किया गया न्यायालय केवल इस अधिनियम के अधीन मामलों की बाबत ही अधिकारिता का प्रयोग करेगा ।

(3) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए किसी जिला या महानगर क्षेत्र में उपधारा (1) के अधीन स्थापित किए गए किसी न्यायालय के पीठासीन अधिकारी की अधिकारिता और शक्तियों का विस्तार, यथास्थिति, समस्त जिला या महानगर क्षेत्र में होगा ।

(4) इस धारा के पूर्वगामी उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए किसी जिले या महानगर क्षेत्र में उपधारा (1) के अधीन स्थापित किए गए किसी न्यायालय को, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की, यथास्थिति, धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन या धारा 16 की उपधारा (1) के अधीन, स्थापित किया गया न्यायालय समझा जाएगा और उस संहिता के उपबंध ऐसे न्यायालयों के संबंध में तद्नुसार लागू होंगे ।

स्पष्टीकरण-इस धारा में उच्च न्यायालय” का वही अर्थ है जो उसका दंड प्रक्रिया संहिता,  1973 (1973 का 2) की धारा 2 के खंड (ड़) में है ।


  22A Immoral Traffic Act –Power to establish special courts

78(1) If the State Government is satisfied that it is necessary for the purpose of providing for speedy trial of offences under this Act in any district or metropolitan area, it may, by notification in the Official Gazette and after consultation with the High Court, establish one or more courts of Judicial Magistrates of the first class, or, as the case may be, Metropolitan Magistrates, in such district or metropolitan area.
(2) Unless otherwise directed by the High Court, a court established under sub-section (1) shall exercise jurisdiction only in respect of cases under this Act.
(3) Subject to the provisions of sub-section (2), the jurisdiction and powers of the presiding officer of a court established under sub-section (1) in any district or metropolitan area shall extend throughout the district or the metropolitan area, as the case may be.
(4) Subject to the foregoing provisions of this section a court established under sub-section (1) in any district or metropolitan area shall be deemed to be a court established under sub-section (1) of section 11, or as the case may be, sub-section (1) of section 16, of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974), and the provisions of that Code shall apply accordingly in relation to such courts.
Explanation.—In this section, “High Court” has the same meaning as in clause (e) of section 2 of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974).


78. Ins. by s. 17, ibid. (w.e.f. 2-10-1979).

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