मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर बेंच ने 12 अगस्त 2025 को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र (Renewable Energy Certificates – RECs) की बिक्री को ‘इलेक्ट्रिकल एनर्जी’ की श्रेणी में मानते हुए VAT कर से छूट प्रदान की। यह फैसला M/S उज्जस एनर्जी लिमिटेड द्वारा दायर दो वैल्यू एडेड टैक्स अपील (VATA No. 48 & 49 of 2021) में आया, जिसमें कंपनी ने VAT विभाग द्वारा लगाए गए 5% कर को चुनौती दी थी।
मामले की पृष्ठभूमि
उज्जस एनर्जी लिमिटेड एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी है, जो ट्रांसफॉर्मर निर्माण, सोलर प्लांट की स्थापना, और सोलर ऊर्जा उत्पादन एवं बिक्री के व्यवसाय में संलग्न है। कंपनी ने राजगढ़ और बारोद में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए, जिससे उत्पन्न बिजली को ओपन एक्सेस सिस्टम के जरिए ग्रिड में बेचा जाता है।
कंपनी न केवल सीधे बिजली बेचती है, बल्कि Renewable Energy Certificates (RECs) भी जारी कराती और बेचती है, जो उन उपभोक्ताओं या कंपनियों को बेचे जाते हैं जिन्हें Renewable Purchase Obligation (RPO) पूरा करना होता है। एक REC का मतलब एक मेगावाट-घंटा नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन होता है।
विवाद का कारण
वित्तीय वर्ष 2012–13 और 2013–14 के लिए आकलन करते समय, वाणिज्यिक कर विभाग ने REC की बिक्री को MP VAT Act के Entry 3, Part-II, Schedule-II के तहत “अमूर्त वस्तु” (intangible goods) की तरह वर्गीकृत किया और 5% VAT लगाया।
कंपनी का तर्क था कि REC किसी कॉपीराइट, पेटेंट या लाइसेंस की तरह कई बार बेची जाने वाली वस्तु नहीं है, बल्कि यह बिजली उत्पादन का प्रतिनिधित्व करने वाला एक सिंगल-यूज सर्टिफिकेट है, जिसे बेचने के बाद यह समाप्त हो जाता है। इसलिए इसे Entry 13, Schedule-I के तहत “इलेक्ट्रिकल एनर्जी” मानकर कर से छूट दी जानी चाहिए।
निचली अदालतों का फैसला
- असेसिंग अथॉरिटी (Deputy Commissioner, Commercial Tax) ने कंपनी के तर्क को खारिज कर REC को अमूर्त वस्तु माना।
- अपील प्राधिकारी (Additional Commissioner, Commercial Tax) ने भी आदेश को बरकरार रखा।
- मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर अपीलीय बोर्ड ने 28 जनवरी 2020 और 25 जून 2020 के आदेशों में विभाग के निर्णय को सही ठहराया।
हाईकोर्ट में उठाए गए प्रश्न
उज्जस एनर्जी ने हाईकोर्ट में निम्न कानूनी प्रश्न रखे:
- क्या अपीलीय बोर्ड ने REC की गलत श्रेणीकरण किया?
- क्या REC को ‘इलेक्ट्रिकल एनर्जी’ के रूप में माना जाना चाहिए और VAT से मुक्त होना चाहिए?
- क्या निचली अदालतों ने कंपनी के कानूनी दृष्टिकोण और प्रासंगिक मिसालों पर विचार नहीं किया?
पक्षकारों की दलीलें
कंपनी का पक्ष (श्री रौनक चौकसे, अधिवक्ता)
- REC एक मेगावाट-घंटा बिजली का प्रतिनिधित्व करता है।
- इसे कॉपीराइट या पेटेंट की तरह कई बार नहीं बेचा जा सकता।
- बिक्री के बाद यह निष्क्रिय हो जाता है और केवल RPO पालन के लिए ही खरीदा जाता है।
- MP VAT Act के तहत बिजली की बिक्री कर मुक्त है, इसलिए REC भी कर मुक्त होना चाहिए।
राज्य का पक्ष (श्री सुदीप भार्गव, उप महाधिवक्ता)
- REC सीधे बिजली की बिक्री नहीं है, बल्कि एक अलग प्रमाणपत्र है।
- यह स्टॉक एक्सचेंज की तरह एनर्जी एक्सचेंज पर ट्रेड होता है।
- VAT कानून में इसे “अमूर्त वस्तु” माना गया है, इसलिए कर लागू है।
हाईकोर्ट का विश्लेषण और निर्णय
पीठ ने पाया कि —
- Electricity Act, 2003 की धारा 86(1)(e) नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए RPO और REC प्रणाली की अनुमति देती है।
- REC का व्यापार बिजली उत्पादन को प्रोत्साहित करने का एक साधन है, और यह प्रत्यक्ष रूप से बिजली से जुड़ा है।
- अमूर्त वस्तुएं (जैसे कॉपीराइट, पेटेंट) कई बार बेची जा सकती हैं, जबकि REC केवल एक बार उपयोग के बाद समाप्त हो जाता है।
- इसलिए इसे VAT कानून के तहत “इलेक्ट्रिकल एनर्जी” के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।
अंतिम आदेश:
- 28 जनवरी 2020 और 25 जून 2020 के निचली अदालतों के आदेश रद्द।
- कंपनी के पक्ष में कर छूट मान्य।
- दोनों VAT अपील (No. 48 & 49 of 2021) स्वीकार।
Case Citation
मामला: मि./स. उज्जस एनर्जी लिमिटेड बनाम वाणिज्यिक कर आयुक्त एवं अन्य
न्यायालय: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ
पीठ: माननीय श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसियामाननीय श्री न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदीअपीलकर्ता पक्ष के अधिवक्ता: श्री रौनक चौकसे, अधिवक्ता
प्रतिवादी/राज्य पक्ष के अधिवक्ता: श्री सुदीप भार्गव, उप महाधिवक्ता
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