पुनर्विलोकन तथा पुनरीक्षण में अंतर

पुनर्विलोकन तथा पुनरीक्षण में अंतर | Difference between Review and Revision

पुनर्विलोकन तथा पुनरीक्षण में अंतर पुनर्विलोकन से क्या अभिप्राय है? पुनरावलोकन का शाब्दिक अर्थ है जांच करना या फिर से अध्ययन करना | मामले के तथ्यों और निर्णय की फिर से जांच या अध्ययन करना पुनर्विलोकन कहलाता है । निर्णय की समीक्षा सीपीसी की धारा 114 में उल्लिखित न्यायालय द्वारा समीक्षा की मूल शक्ति है।…

डिक्री ( आज्ञप्ति) और आदेश में अंतर

CPC- डिक्री ( आज्ञप्ति) और आदेश में अंतर |Distinction between a Decree or an Order in hindi

डिक्री ( आज्ञप्ति) और आदेश में अंतर (Distinction between a Decree or an Order in hindi) डिक्री  की  परिभाषा क्या है :- सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 2(2) में डिक्री  को परिभाषित किया गया है “डिक्री से ऐसे न्याय निर्णयन की प्ररूपिक अभिव्यक्ति(formal expression of adjudication) अभिप्रेत है जो जहां तक कि वह उसे…

दीवानी प्रकृति के वाद

CPC- दीवानी प्रकृति के वाद | सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 | sec 9 of cpc hindi | suit of civil nature in hindi

दीवानी प्रकृति के वाद | सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 9 प्रस्तावना- सिविल प्रक्रिया संहिता  की धारा 9 ‘दीवानी प्रकृति के वाद का निर्धारण किया गया है जिसमे सम्पत्ति सम्बन्धी या पद सम्बन्धी अधिकार विवादित होता है चाहे ऐसा अधिकार धार्मिक कृत्यों या कर्मों सम्बन्धी प्रश्नों के निर्णय पर पूर्ण रूप से आधारित हो इसमें वर्णित…

न्यायालय की कमीशन जारी करने की शक्ति

CPC-न्यायालय की कमीशन जारी करने की शक्ति | commission – section 75-78 and order 26 of CPC in hindi

न्यायालय की कमीशन जारी करने की शक्ति सारांश (Abstract) –  विधि का यह सर्वमान्य सिद्धांत है की किसी वाद की सम्पूर्ण कार्यवाही वाद के पक्षकारों के समक्ष संचालित की जाये, साक्षियों की साक्ष्य जिनकी उपस्थिति में न्यायालय  में लिया जाये ! परन्तु कई बार ऐसी परिस्थिति होती होती है की वाद के पक्षकार या साक्षी…