मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर की एकल पीठ, माननीय न्यायमूर्ति विवेक जैन ने आशीष कुर्मी बनाम मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य (रिट याचिका क्र. 33432/2024) में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए ग्राम रोजगार सहायक की सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर दिया।
याचिकाकर्ता की सेवाएं लोकायुक्त द्वारा विशेष न्यायालय में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत चालान पेश होने के बाद 07.10.2024 को समाप्त कर दी गई थीं।
पृष्ठभूमि
आशीष कुर्मी, जो ग्राम रोजगार सहायक (Gram Rojgar Sahayak) के पद पर संविदा (Contract) पर कार्यरत थे, के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया गया।
लोकायुक्त, सागर ने विशेष न्यायालय में चार्जशीट (चालान) पेश की, जिसके बाद 07.10.2024 को उनके संविदा सेवा को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया।
इस आदेश को कुर्मी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, यह कहते हुए कि —
- बर्खास्तगी से पहले न तो शो कॉज़ नोटिस (Show Cause Notice) दिया गया,
- न ही सुनवाई का अवसर (Opportunity of Hearing) प्रदान किया गया।
याचिकाकर्ता के तर्क
- नियमों का उल्लंघन:
नियुक्ति आदेश की शर्त संख्या 15 में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि किसी संविदा कर्मचारी के खिलाफ अगर कोई आपराधिक या अनुशासनहीनता का मामला सामने आता है, तो उसकी सेवा समाप्त करने से पहले उचित अवसर देना अनिवार्य है। - अदालत में दोष सिद्ध नहीं:
अब तक आपराधिक न्यायालय द्वारा कोई दोष सिद्ध (Conviction) नहीं हुआ है, इसलिए मात्र चार्जशीट दाखिल होने पर सेवा समाप्त करना गलत है। - पूर्व निर्णयों का हवाला:
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के पूर्व फैसलों (विशेषकर WP No. 14966/2023 और WA No. 1199/2021) का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि संविदा कर्मचारी को हटाने से पहले एक महीने का नोटिस और सुनवाई का अवसर अनिवार्य है।
राज्य सरकार का पक्ष
- सरकारी परिपत्र का हवाला:
राज्य सरकार ने 21.02.2018, 26.02.2018 और 02.11.2019 के सरकारी परिपत्रों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया कि अगर किसी संविदा कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार या नैतिक अधमता (Moral Turpitude) का मामला दर्ज होता है और चालान कोर्ट में पेश होता है, तो उसे बिना नोटिस हटाया जा सकता है। - विशेष रूप से ग्राम रोजगार सहायक पर लागू:
02.11.2019 का परिपत्र विशेष रूप से ग्राम रोजगार सहायकों पर लागू है, इसलिए याचिकाकर्ता को नोटिस या सुनवाई का अधिकार नहीं था।
अदालत का विश्लेषण
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान यह पाया कि —
- याचिकाकर्ता का मामला WP No. 14966/2023 के समान है, जिसमें डिवीजन बेंच (WA No. 1199/2021) ने यह स्पष्ट किया था कि संविदा कर्मचारी की सेवा समाप्त करने से पहले अनुबंध की शर्तों के अनुसार एक महीने का नोटिस देना आवश्यक है।
- यह भी कहा गया था कि भले ही मामला भ्रष्टाचार का हो, फिर भी संविदा कर्मचारी को उचित अवसर (Reasonable Opportunity) दिया जाना चाहिए।
- सरकारी परिपत्र, अनुबंध की शर्तों को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर सकते; दोनों का पालन जरूरी है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि डिवीजन बेंच के आदेश में साफ कहा गया है —
“यदि संविदा समाप्ति से पहले एक महीने का नोटिस नहीं दिया गया, तो बर्खास्तगी आदेश टिक नहीं सकता।”
कोर्ट का फैसला
- 07.10.2024 का सेवा समाप्ति आदेश रद्द (Set Aside) किया गया।
- याचिकाकर्ता को सेवा में बने रहने की अनुमति दी गई।
- राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता दी गई कि वे भविष्य में अनुबंध की शर्तों और नोटिस अवधि का पालन करते हुए कार्रवाई कर सकती है।
- कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अगर WP No. 14966/2023 के खिलाफ दायर अपील (Writ Appeal) में निर्णय बदलता है, तो इसका प्रभाव याचिकाकर्ता पर भी पड़ेगा।
Case Citation
मामला: आशीष कुर्मी बनाम मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य WP 33432 of 2024)न्यायालय: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
पीठ: माननीय न्यायमूर्ति विवेक जैन
याचिकाकर्ता की ओर से: श्री सिद्धांत कोचर, अधिवक्ता
प्रतिवादी/राज्य की ओर से: श्री प्रवीण नमदेव, सरकारी अधिवक्ता
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