मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया जिसमें डॉ. साक्षी चोकखंड्रे और डॉ. यशदीप चौहान के बीच दंत विशेषज्ञ (Dental Specialist) पद पर नियुक्ति को लेकर चले विवाद को सुलझाया गया। यह मामला MPPSC (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था। हाईकोर्ट के इस आदेश ने न केवल भर्ती नियमों की व्याख्या स्पष्ट की बल्कि यह भी तय किया कि “डिग्री प्राप्त करने” और “डिग्री प्रमाणपत्र मिलने” में फर्क होता है।
मामले की पृष्ठभूमि
मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने 17 अगस्त 2022 को दंत विशेषज्ञ (Dental Specialist) पद के लिए विज्ञापन जारी किया। कुल 14 पदों में से 2 पद अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित थे, जिनमें से एक विशेष रूप से SC (महिला) उम्मीदवार के लिए रखा गया था।
- डॉ. साक्षी चोकखंड्रे (SC- महिला वर्ग से) और डॉ. यशदीप चौहान (SC वर्ग से) दोनों ने आवेदन किया।
- शर्त थी कि उम्मीदवार के पास 15 अक्टूबर 2022 तक MDS (Master of Dental Surgery) की डिग्री होनी चाहिए।
- साक्षी ने मई 2022 में MDS की परीक्षा दी, परिणाम 27 अगस्त 2022 को घोषित हुआ।
- प्रिंटेड मार्कशीट 7 दिसंबर 2022 को और डिग्री प्रमाणपत्र 17 मार्च 2023 को जारी हुआ।
इस बीच, साक्षी चोकखंड्रे का चयन SC (महिला) वर्ग से किया गया और उन्हें 9 फरवरी 2024 को नियुक्ति आदेश भी जारी हो गया।
विवाद की शुरुआत
चयन सूची में न आने पर डॉ. यशदीप चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
उनका मुख्य तर्क था कि—
- साक्षी चोकखंड्रे कट-ऑफ डेट (15.10.2022) तक डिग्री प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सकीं।
- भर्ती विज्ञापन के अनुसार आवश्यक सभी प्रमाणपत्र अंतिम तिथि तक जमा होना अनिवार्य था।
- साक्षी के पास केवल BDS की रजिस्ट्रेशन थी, जबकि MDS डिग्री बाद में जारी हुई।
इस आधार पर उन्होंने साक्षी की नियुक्ति रद्द करने और अपनी नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की।
साक्षी चोकखंड्रे और MPPSC का पक्ष
साक्षी और आयोग ने अपने बचाव में यह दलीलें दीं—
- योग्यता (Eligibility) परिणाम घोषित होने से पूरी हो जाती है, प्रमाणपत्र मिलना केवल औपचारिक (procedural) प्रक्रिया है।
- MDS परीक्षा का परिणाम 27 अगस्त 2022 को घोषित हो चुका था, इसलिए साक्षी योग्य थीं।
- नियुक्ति “प्रोविजनल” (provisional) थी और जॉइनिंग के समय मूल दस्तावेज जमा करना पर्याप्त था।
- आयोग और राज्य सरकार दोनों ने उनकी योग्यता को मान्यता दी थी।
एकल पीठ का फैसला
पहले चरण में, हाईकोर्ट की एकल पीठ (Single Judge) ने याचिका स्वीकार कर ली और कहा कि—
- कट-ऑफ डेट तक उम्मीदवार को डिग्री प्रमाणपत्र होना चाहिए।
- केवल ऑनलाइन परिणाम पर्याप्त नहीं है।
- इसलिए साक्षी अयोग्य थीं और उनकी नियुक्ति रद्द की जाती है।
डिवीजन बेंच में अपील
साक्षी और MPPSC ने इस आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच (न्यायमूर्ति विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी) में अपील की।
अपीलकर्ताओं का तर्क:
- योग्यता परिणाम घोषित होते ही पूरी हो गई थी।
- सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णय (जैसे Charles K. Skaria v. Dr. Mathew, Dolly Chandra v. JEE) बताते हैं कि योग्यता और उसका प्रमाण अलग बातें हैं।
- प्रमाणपत्र न मिलने की स्थिति में उम्मीदवार को अयोग्य ठहराना न्यायसंगत नहीं है।
प्रतिवादी (यशदीप चौहान) का तर्क:
- विज्ञापन स्पष्ट था कि कट-ऑफ डेट तक डिग्री और रजिस्ट्रेशन जरूरी है।
- साक्षी ने समय पर डिग्री और MDS रजिस्ट्रेशन प्रस्तुत नहीं किया।
- इसलिए चयन प्रक्रिया में उन्हें शामिल करना गलत था।
हाईकोर्ट का अंतिम फैसला (26 अगस्त 2025)
डिवीजन बेंच ने एकल पीठ का आदेश रद्द कर दिया और कहा—
- साक्षी चोकखंड्रे कट-ऑफ डेट तक MDS परीक्षा पास कर चुकी थीं, इसलिए वे योग्य थीं।
- डिग्री प्रमाणपत्र का देर से जारी होना महज औपचारिकता है, इसे आधार बनाकर योग्यता नकारना गलत है।
- आयोग और राज्य सरकार दोनों ने उनकी योग्यता स्वीकार की थी, ऐसे में कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
- यशदीप चौहान की याचिका खारिज की जाती है।
इस प्रकार, साक्षी चोकखंड्रे की नियुक्ति बहाल कर दी गई और MPPSC को राहत मिली।
कानूनी महत्व (Legal Significance)
यह फैसला बताता है कि—
- कट-ऑफ डेट तक परीक्षा पास करना ही मुख्य योग्यता है, प्रमाणपत्र बाद में भी चल सकता है।
- न्यायालयों को भर्ती प्रक्रिया में तभी दखल देना चाहिए जब चयन स्पष्ट रूप से अवैध हो।
- तकनीकी कारणों से योग्य उम्मीदवारों को बाहर करना न्यायसंगत नहीं है।
निष्कर्ष
MP High Court (Indore Bench) का यह फैसला भर्ती विवादों में एक अहम नज़ीर है। इससे यह सिद्ध हुआ कि “डिग्री पास करना” और “डिग्री का प्रमाणपत्र प्राप्त करना” अलग-अलग बातें हैं। योग्य उम्मीदवार को केवल कागजी औपचारिकताओं के आधार पर अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता।
Case Citation
मामला:डॉ. साक्षी चोकखंड्रे बनाम मध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य WA 1453/2025
न्यायालय: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर पीठ (Division Bench)
पीठ; माननीय न्यायमूर्ति विवेक रूसिया एवं माननीय न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी
याचिकाकर्ता की ओर से : श्री प्रकाश चन्द्र चंदिल, अधिवक्ता
अपीलकर्ता (Appellant) की ओर से: श्रीमती अर्चना खेड़, अधिवक्ता
प्रतिवादी क्रमांक की ओर से: श्री भुवन गौतम, शासकीय अधिवक्ता
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