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फूड सेफ्टी केस : दोषपूर्ण जांच पर अभियोजन को दोबारा मौका नहीं

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, इंदौर पीठ ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया, जिसमें फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के अंतर्गत दायर विवाद से जुड़े अपीलीय न्यायालय के पुनः ट्रायल (Re-Trial) के आदेश को निरस्त कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन (Prosecution) को अपनी कमजोरियों को दूर करने के लिए दूसरा अवसर नहीं दिया जा सकता और अपीलीय अदालत को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय करना होगा।


मामले की पृष्ठभूमि

  1. निरीक्षण और सैंपल जाँच – फूड इंस्पेक्टर ने नीमच जिले में स्थित विजय एजेंसी नामक दुकान से विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूने लिए, जिनमें पान पराग भी शामिल था। जाँच के बाद रिपोर्ट आई कि यह उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा।
  2. प्रथम आदेश – अधीनस्थ न्यायालय (एडीएम/अजुडिकेटिंग ऑफिसर, नीमच) ने 18 अक्टूबर 2021 को अभियोजन पक्ष की दलील मानते हुए स्वस्तिक ट्रेडर्स सहित अन्य आरोपियों पर ₹1,00,000 का जुर्माना लगाया।
  3. अपील – याचिकाकर्ताओं ने RCA/60/2021 के तहत अपील दायर की। अपीलीय न्यायालय ने 8 जुलाई 2024 को जुर्माना हटाते हुए मामला पुनः ट्रायल हेतु अधीनस्थ न्यायालय को वापस भेज दिया।
  4. हाईकोर्ट में पुनरीक्षण – अपीलीय न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए याचिकाकर्ताओं ने सिविल रिवीजन (CR-1102/2024) हाईकोर्ट, इंदौर में प्रस्तुत की।

याचिकाकर्ता का पक्ष

  • अपीलीय अदालत ने जो पुनः ट्रायल का आदेश दिया, वह विधि के सिद्धांतों के विपरीत है।
  • अधीनस्थ न्यायालय और अभियोजन पक्ष द्वारा कई मूल दस्तावेज (जैसे पन्चनामा, फूड एनालिस्ट की मूल रिपोर्ट, टैक्स इनवॉइस, गवाह का सही बयान) प्रस्तुत ही नहीं किए गए थे।
  • फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 46(4) के तहत अपील का अधिकार याचिकाकर्ताओं से छीना गया।
  • जब अभियोजन स्वयं ही पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा, तो उसे दूसरा मौका नहीं मिलना चाहिए।

राज्य का पक्ष

  • राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कहा कि अपीलीय अदालत ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर ही आदेश पारित किया।
  • पुनः ट्रायल का आदेश न्यायोचित है क्योंकि कुछ तकनीकी खामियों को दूर करना आवश्यक है।

हाईकोर्ट की विवेचना

न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने आदेश पारित करते हुए विस्तार से कानूनी बिंदुओं पर चर्चा की:

  1. साक्ष्यों की कमी – अभियोजन पक्ष मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहा। केवल फोटोकॉपी और अधूरे दस्तावेज दाखिल किए गए थे।
  2. प्रक्रियागत त्रुटियाँ
    • फूड एनालिस्ट की रिपोर्ट निर्धारित समय (14 दिन) में प्रस्तुत नहीं हुई।
    • पन्चनामा और चार्जशीट पर सक्षम प्राधिकारी (Upper Collector) के हस्ताक्षर नहीं थे।
    • कई आवश्यक दस्तावेज रिकॉर्ड में ही नहीं थे।
  3. कानूनी सिद्धांत – सुप्रीम कोर्ट के मामलों Mussuddin Ahmed vs State of Assam (2009) और Satyajit Banerjee vs State of West Bengal (2005) का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि पुनः ट्रायल केवल असाधारण परिस्थितियों में ही संभव है, जहाँ न्याय में गंभीर चूक या “Mock Trial” हो। सामान्य त्रुटियों के लिए अभियोजन को दूसरा मौका नहीं दिया जा सकता।
  4. समानता का सिद्धांत – कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्ष कानून की नजर में बराबर हैं। अभियोजन को सुधारने का विशेष अवसर देना, अभियुक्तों के प्रति अन्याय होगा।

हाईकोर्ट का निर्णय

  • अपीलीय न्यायालय द्वारा दिया गया पुनः ट्रायल का आदेश निरस्त किया गया।
  • अपीलीय न्यायालय को निर्देश दिया गया कि वह उपलब्ध साक्ष्यों और दलीलों के आधार पर ही अपील का निपटारा करे।
  • याचिकाकर्ताओं द्वारा जमा किया गया जुर्माना (₹1,00,000) वापस करने का आदेश दिया गया।
  • दोनों पक्षों को 15 अक्टूबर 2025 को अपीलीय अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया।

Case Citation

मामला:स्वस्तिक ट्रेडर्स एवं अन्य बनाम मध्यप्रदेश राज्य CR 1102/2024
न्यायालय: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर पीठ
पीठ; माननीय श्री न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी
याचिकाकर्ता की ओर से : श्री आकाश शर्मा, अधिवक्ता
प्रतिवादी/राज्य की ओर से : सुश्री मृदुला सेन, शासकीय अधिवक्ता (Govt. Advocate)

Source – MP High Court

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