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धारा 24(4) राजस्व संहिता: अपील की समय-सीमा को नजरअंदाज करना न्यायिक त्रुटि – इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में दिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह स्पष्ट किया कि U.P. Revenue Code, 2006 की धारा 24(4) के अंतर्गत दाखिल अपील को 30 दिन की समय-सीमा के भीतर प्रस्तुत करना अनिवार्य है। यदि अपील समय-सीमा से बाहर दाखिल की जाती है तो उसे पहले देरी माफी (condonation of delay) के आदेश के बिना स्वीकार करना न्यायिक त्रुटि है।


केस की पृष्ठभूमि

  • विवाद भूमि माप (demarcation) और सीमांकन से जुड़ा था।
  • याचिकाकर्ता के पिता ने 01.09.2017 को U.P. Revenue Code की धारा 20/24 के तहत आवेदन दाखिल किया।
  • तहसीलदार व लेखपाल द्वारा जांच और रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसे 08.06.2022 को उपजिलाधिकारी (Deputy Collector) ने स्वीकार किया।
  • इसके विरुद्ध 12.04.2023 को प्रतिवादी संख्या 5 (Upendra Nath Singh) ने अपील दाखिल की।
  • यह अपील 10 माह की देरी से दाखिल हुई, जबकि कानून में 30 दिन की समय-सीमा तय है।

अपीलीय अदालत का आदेश

  • अपर आयुक्त (न्यायिक), वाराणसी मंडल ने इस अपील को 26.04.2023 को स्वीकार कर नोटिस जारी किया।
  • 01.06.2023 को “status quo” का अंतरिम आदेश भी पारित किया गया।
  • अंततः 17.05.2025 को अपील को सुनकर स्वीकार कर लिया गया।

याचिकाकर्ता की दलीलें

  1. अपील समय-सीमा (Limitation) से बाहर थी, इसलिए पहले देरी माफी का आदेश पारित होना जरूरी था।
  2. बिना देरी माफी आदेश के अपील पर सुनवाई करना अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) से परे है।
  3. ग्राम पंचायत को आवश्यक पक्षकार (necessary party) न बनाना अपील को दोषपूर्ण बनाता है।
  4. अपीलीय प्राधिकारी ने याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर विचार किए बिना ही अपील का निस्तारण किया।

प्रतिवादियों की दलीलें

  • प्रतिवादी पक्ष का कहना था कि उन्होंने अपील के साथ देरी माफी का आवेदन और शपथपत्र दिया था।
  • Limitation Act, 1963 की धारा 5 के अनुसार यदि उचित कारण बताया जाए तो अदालत देरी माफ कर सकती है।
  • न्याय के हित में तकनीकी खामियों को दरकिनार कर मामले की सुनवाई की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट का निर्णय

हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद निम्नलिखित बिंदुओं पर अपना आदेश दिया –

  1. समय-सीमा का पालन आवश्यक – धारा 24(4) U.P. Revenue Code, 2006 में अपील दाखिल करने के लिए 30 दिन की सीमा तय है।
  2. देरी माफी अनिवार्य – यदि अपील विलंब से दाखिल हो, तो बिना देरी माफी आदेश पारित किए अदालत उसे सुन ही नहीं सकती।
  3. अधिकार क्षेत्र से बाहर कार्यवाही – अपीलीय अदालत ने बिना देरी माफी आदेश के अपील स्वीकार कर सुनवाई की, जो न्यायिक त्रुटि है।
  4. मामला वापस भेजा गया – हाईकोर्ट ने 17.05.2025 का आदेश रद्द कर दिया और अपीलीय अदालत को निर्देश दिया कि पहले देरी माफी पर आदेश दे, उसके बाद ही अपील की सुनवाई हो।

कानूनी महत्व

यह निर्णय इस तथ्य को और मजबूत करता है कि—

  • Limitation केवल तकनीकी औपचारिकता नहीं बल्कि न्यायिक अधिकार का प्रश्न है।
  • यदि कोई अपील समय-सीमा से बाहर है, तो उसे वैधानिक रूप से “दाखिल” ही नहीं माना जाएगा, जब तक कि देरी को विधिवत माफ न किया जाए।
  • यह फैसला भविष्य में U.P. Revenue Code, 2006 के अंतर्गत आने वाले सभी मामलों के लिए एक मार्गदर्शक आदेश साबित होगा।

Case Citation

मामला:  दीनानाथ सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य WRIT - C No. 22221 of 2025
Neutral Citation No.: 2025:AHC:123012
न्यायालय: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court)
पीठ (Bench): माननीय न्यायाधीश सैयद कमर हसन रिज़वी, (Hon’ble Syed Qamar Hasan Rizvi, J.)
याचिकाकर्ता (Petitioners) की ओर से: श्री निखिल कुमार, श्री वागीश यादव
प्रतिवादी राज्य (State of U.P.) की ओर से: श्री नंदलाल मौर्य
प्रतिवादी संख्या 5 की ओर से: श्री राकेश सिंह

Source – Allahabad High Court

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