मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने Vinayak Prasad Tiwari बनाम राज्य शासन में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बोर्ड परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में निलंबित प्रिंसिपल की याचिका खारिज कर दी। यह निर्णय न्यायमूर्ति विवेक जैन द्वारा दिया गया। आदेश का मूल प्रश्न यह था कि क्या कलेक्टर को अधिकार था कि वह एक क्लास-II अधिकारी (उच्च माध्यमिक शिक्षक एवं प्रभारी प्राचार्य) को निलंबित कर सके?
प्रकरण की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता विनायक प्रसाद तिवारी उस समय उमरिया जिले के सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, चंदिया में प्रभारी प्राचार्य और केंद्राध्यक्ष (Centre Superintendent) थे।
21 मार्च 2023 को कक्षा 12वीं की गणित परीक्षा के दौरान यह आरोप लगा कि—
- प्रश्नपत्र का PDF समय से पहले बाहर भेजा गया।
- आरोपी प्राचार्य के मोबाइल से समाधान (answers) अन्य शिक्षकों को भेजे गए।
- इस कृत्य से परीक्षा की गोपनीयता और विश्वसनीयता भंग हुई।
इसी आधार पर कलेक्टर, उमरिया ने निलंबन आदेश (21.03.2023) जारी किया, चार्जशीट (26.04.2023) दी और बाद में विभागीय जांच रिपोर्ट (09.08.2024) भी प्रस्तुत की गई।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि –
- वे क्लास-II कर्मचारी हैं।
- M.P. Civil Services (CCA) Rules, 1966 के अनुसार कलेक्टर को केवल क्लास-III और क्लास-IV कर्मचारियों के विरुद्ध ही निलंबन/दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार है।
- इसलिए निलंबन आदेश एवं चार्जशीट विधिक रूप से अवैध है।
राज्य पक्ष की दलील
राज्य शासन की ओर से अधिवक्ता ने तर्क दिया कि—
- याचिकाकर्ता मात्र कर्मचारी नहीं बल्कि Centre Superintendent थे।
- परीक्षा की गोपनीयता भंग करना गंभीर अपराध है।
- इस मामले में एफआईआर (Crime No.131/2023) दर्ज की गई जिसमें IPC की धाराएँ 409, 420, 120-B एवं M.P. Recognized Examination Act, 1937 लागू की गईं।
- परीक्षा संचालन संबंधी दिशा-निर्देश (Clause 1.13) और M.P. Madhyamik Shiksha Adhiniyam, 1965 के तहत कलेक्टर को तत्काल कार्रवाई करने का अधिकार है।
न्यायालय का विश्लेषण
- निलंबन की वैधता –
- न्यायालय ने माना कि कलेक्टर के पास क्लास-II कर्मचारी को निलंबित करने का वैधानिक अधिकार नहीं है।
- परंतु याचिकाकर्ता 3 महीने से अधिक समय तक जेल हिरासत में रहे।
- CCA Rules, Rule 9(2)(a) के अनुसार यदि कोई सरकारी कर्मचारी 48 घंटे से अधिक हिरासत में रहता है तो वह स्वतः निलंबित माना जाता है।
- इसलिए भले ही आदेश तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण था, लेकिन परिणाम न्यायसंगत था।
- चार्जशीट की वैधता –
- चार्जशीट कलेक्टर ने जारी की, जबकि उनके पास क्लास-II कर्मचारी पर ऐसा करने का अधिकार नहीं था।
- परंतु उच्चतम न्यायालय के पूर्व निर्णयों के आधार पर यह सिद्ध हुआ कि चार्जशीट केवल नियंत्रण प्राधिकारी (controlling authority) द्वारा भी जारी की जा सकती है।
- अंतिम निर्णय और दंड देने का अधिकार केवल नियुक्ति/अनुशासनिक प्राधिकारी के पास रहेगा।
- न्यायसंगत दृष्टिकोण –
- कोर्ट ने कहा कि यदि केवल तकनीकी आधार पर निलंबन रद्द कर दिया जाए तो यह “अवैधता को पुनर्जीवित” करने जैसा होगा।
- न्यायालय का दायित्व केवल वैधानिकता देखना ही नहीं बल्कि न्याय सुनिश्चित करना भी है।
- इसलिए कोर्ट ने निलंबन आदेश को बरकरार रखा।
न्यायालय का आदेश
- निलंबन आदेश (21.03.2023) बरकरार रखा गया।
- चार्जशीट एवं जांच रिपोर्ट को अब डिविजनल कमिश्नर/नियुक्ति प्राधिकारी के समक्ष रखा जाएगा, जो 90 दिनों के भीतर आगे का निर्णय लेगा।
- याचिका खारिज की गई, याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी गई।
महत्व एवं प्रभाव
यह फैसला कई बिंदुओं पर महत्वपूर्ण है:
- निलंबन नियम स्पष्ट – 48 घंटे से अधिक हिरासत होने पर सरकारी कर्मचारी स्वतः निलंबित माना जाएगा।
- कलेक्टर की सीमा – कलेक्टर केवल क्लास-III और IV कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकता है, परंतु परीक्षा गोपनीयता भंग जैसी स्थिति में आपात कार्रवाई कर सकता है।
- न्यायालय की दृष्टि – तकनीकी त्रुटि के बावजूद यदि आदेश न्यायहित में है तो उसे बरकरार रखा जा सकता है।
- शिक्षा व्यवस्था पर संदेश – बोर्ड परीक्षा प्रश्नपत्र लीक को गंभीर अपराध मानते हुए न्यायालय ने कठोर रुख अपनाया।
Case Citation
मामला:विनायक प्रसाद तिवारी बनाम मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य रिट याचिका क्रमांक : 1674/2025
न्यूट्रल सिटेशन : 2025:MPHC-JBP:41514
निर्णय दिनांक : 29 अगस्त 2025
न्यायालय: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
पीठ; माननीय श्री न्यायमूर्ति विवेक जैन
याचिकाकर्ता की ओर से : श्री विजय कुमार शुक्ला, अधिवक्ता
प्रतिवादी/राज्य की ओर से : श्री योगेश धांडे, शासकीय अधिवक्ता
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