मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर की खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अंतर्गत यदि मृतक कर्मचारी की एक से अधिक विधवाएँ हों, तो वे सभी पारिवारिक पेंशन की समान रूप से हकदार होंगी। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक जैन ने पारित किया।
केस की पृष्ठभूमि
मृतक कर्मचारी अब्दुल जब्बार खान का निधन 16 जनवरी 2017 को सेवा में रहते हुए हुआ।
- सेवा अभिलेखों (Service Records) में केवल वहीदा बी का नाम पत्नी के रूप में दर्ज था और उनके बच्चों के नाम भी शामिल थे।
- दूसरी ओर, सबीया खान ने दावा किया कि वह भी मृतक की पत्नी थीं और उनके दो बच्चे हैं।
दोनों पक्षों के बीच उत्तराधिकार (Succession) को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। इसके लिए उत्तराधिकार वाद क्रमांक 3/2017 दर्ज किया गया, जिसमें अंततः आपसी समझौता (Compromise) हुआ। समझौते के अनुसार, दोनों पत्नियों ने स्वीकार किया कि वे मृतक कर्मचारी की विधवा हैं और मृतक की चल-अचल संपत्ति एवं सेवा संबंधी लाभों में 50-50 प्रतिशत हिस्सा पाने पर सहमति बनी।
हालाँकि, जब परिवार पेंशन की बात आई तो नियोक्ता विभाग (प्रतिवादी क्रमांक 7 एवं 8) ने यह कहते हुए आपत्ति उठाई कि सेवा अभिलेख में केवल वहीदा बी का नाम दर्ज है, इसलिए सबीया खान को पेंशन नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिकाकर्ता (सबीया खान) ने कोर्ट में यह तर्क दिया कि –
- मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार मुस्लिम पुरुष की दूसरी शादी अवैध (Void) नहीं होती।
- उत्तराधिकार वाद में दोनों पक्षों ने लिखित समझौते के जरिए यह स्वीकार किया है कि दोनों ही विधवाएँ हैं।
- चूँकि अन्य सभी सेवा लाभ (ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट आदि) पहले ही 50-50 प्रतिशत में बाँटे जा चुके हैं, इसलिए परिवार पेंशन भी बराबर हिस्सों में बाँटा जाना चाहिए।
प्रतिवादियों की दलील
राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने यह दलील दी कि –
- सेवा अभिलेख में केवल वहीदा बी का नाम पत्नी के रूप में दर्ज था।
- उत्तराधिकार वाद में हुआ समझौता सरकारी विभाग पर बाध्यकारी (Binding) नहीं है क्योंकि विभाग उस समझौते का पक्षकार नहीं था।
- परिवार पेंशन उत्तराधिकार संपत्ति की श्रेणी में नहीं आती, बल्कि यह केवल नामित लाभार्थियों और पात्र विधवाओं को मिलती है।
न्यायालय का विश्लेषण
हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार किया –
- नियम 47(7)(a)(i), म.प्र. सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976
इस नियम के अनुसार यदि किसी मृतक कर्मचारी की एक से अधिक विधवाएँ हों तो परिवार पेंशन उन्हें समान भागों (Equal Shares) में दी जाएगी। - मुस्लिम पर्सनल लॉ का प्रभाव
मुस्लिम धर्म में दूसरी शादी अवैध नहीं मानी जाती। अतः यदि मृतक की दूसरी पत्नी विधिक रूप से विवाहित थी, तो वह भी पेंशन की हकदार होगी। - समझौते की स्थिति
उत्तराधिकार वाद में दोनों विधवाओं ने स्पष्ट रूप से यह स्वीकार किया था कि वे दोनों मृतक की पत्नियाँ हैं और सेवा लाभों में 50-50 हिस्सेदारी पर सहमत हैं। - सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला
न्यायालय ने Sneh Gupta बनाम देवी सरूप (2009) 6 SCC 194 और Dwarka Prasad Agarwal बनाम B.D. Agarwal (2003) 6 SCC 230 जैसे फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि समझौता केवल उन्हीं पक्षकारों पर बाध्यकारी है जो उसका हिस्सा हों। लेकिन चूँकि यहाँ विवाद केवल परिवार पेंशन के हिस्सेदारी पर था और दोनों विधवाओं ने आपसी सहमति दी थी, इसलिए इसे स्वीकार किया जा सकता है।
Case Citation
मामला:सबीया खान एवं अन्य बनाम वहीदा बी एवं अन्य (Writ Petition No. 11328/2021)
न्यूट्रल सिटेशन : 2025:MPHC-JBP:42775
निर्णय दिनांक : 03 सितम्बर 2025
न्यायालय: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
पीठ; माननीय श्री न्यायमूर्ति विवेक जैन
याचिकाकर्ता की ओर से : श्री आदित्य पांडेय, अधिवक्ता
प्रतिवादी/राज्य की ओर से : श्री वी.पी. तिवारी, शासकीय अधिवक्ता
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