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अंगनवाड़ी सहायक नियुक्ति विवाद: BPL कार्ड धारक को बोनस अंक का हक,मध्यप्रदेश हाईकोर्ट

अंगनवाड़ी सहायक नियुक्ति विवाद BPL कार्ड

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने एक महत्वपूर्ण आदेश में यह स्पष्ट कर दिया कि यदि उम्मीदवार के पास आवेदन के समय वैध BPL कार्ड हो, तो उसे बोनस अंक देने से इनकार नहीं किया जा सकता। यह मामला अंगनवाड़ी सहायक नियुक्ति विवाद से जुड़ा हुआ था, जिसमें याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी को बोनस अंक देने के आदेश को चुनौती दी थी।

तथ्य एवं पृष्ठभूमि

अक्टूबर 2019 में अंगनवाड़ी सहायक के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हुई। याचिकाकर्ता और प्रतिवादी दोनों ने आवेदन किया। चयन सूची में प्रतिवादी को प्रथम और याचिकाकर्ता को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। दोनों को BPL श्रेणी के आधार पर 10 बोनस अंक दिए गए थे।

याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी के BPL बोनस अंक पर आपत्ति दर्ज की। जांच के बाद प्रतिवादी के बोनस अंक हटा दिए गए और याचिकाकर्ता को नियुक्ति आदेश जारी किया गया।

प्रतिवादी ने इस आदेश के खिलाफ अपील की। अतिरिक्त कलेक्टर ने भी याचिकाकर्ता के पक्ष में निर्णय दिया। लेकिन अतिरिक्त आयुक्त (शहडोल) ने दूसरी अपील में प्रतिवादी के पक्ष में आदेश देते हुए बोनस अंक बहाल कर दिए।


हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य विवाद

मुख्य प्रश्न यह था कि —

  • क्या याचिकाकर्ता सही था प्रतिवादी के बोनस अंक हटाने में?
  • क्या BPL कार्ड वैध होने के बावजूद बोनस अंक रोके जा सकते हैं?

न्यायालय की प्रमुख टिप्पणियाँ

हाईकोर्ट ने कहा कि –

  • आवेदन की तिथि पर प्रतिवादी के पति के पास वैध BPL कार्ड था।
  • यद्यपि उनके पास पहले मैजिक वाहन था, लेकिन वह बैंक द्वारा पुनः ले लिया गया था।
  • SDO और तहसीलदार ने प्रतिवादी के BPL कार्ड को वैध माना था और यह आदेश अंतिम रूप से लागू हो चुका था।
  • ऐसे में अतिरिक्त कलेक्टर को BPL अंक हटाने का अधिकार नहीं था।

निर्णय

न्यायमूर्ति विवेक जैन ने कहा कि प्रतिवादी को 10 बोनस अंक मिलने का हक है। अतिरिक्त आयुक्त का आदेश सही और विधिसम्मत है। याचिकाकर्ता की याचिका खारिज कर दी गई।


केस से मिलने वाले कानूनी सिद्धांत

  1. BPL कार्ड की वैधता: यदि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी BPL कार्ड निरस्त नहीं हुआ है तो उसके आधार पर दिए गए लाभ को हटाना गलत है।
  2. प्रशासनिक आदेश की अंतिमता: SDO और तहसीलदार के आदेश, जिन्हें चुनौती नहीं दी गई है, वे अंतिम माने जाएंगे।
  3. नियुक्ति विवादों में निष्पक्षता: चयन सूची में परिवर्तन तभी किया जा सकता है जब कोई ठोस कानूनी आधार हो।

निष्कर्ष

यह फैसला बताता है कि नियुक्ति प्रक्रिया में BPL कार्ड धारकों को उनका कानूनी हक मिलना चाहिए। यदि सक्षम प्राधिकारी ने BPL कार्ड वैध माना है, तो उसके लाभ को नकारना अनुचित है। यह निर्णय भविष्य में अन्य नियुक्ति विवादों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है।

Case Citation

मामला:सबीया खान एवं अन्य बनाम वहीदा बी एवं अन्य (Writ Petition No. 11328/2021)
न्यूट्रल सिटेशन : 2025:MPHC-JBP:43878
निर्णय दिनांक : 10 सितम्बर 2025
न्यायालय: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
पीठ; माननीय श्री न्यायमूर्ति विवेक जैन
याचिकाकर्ता की ओर से : श्री अनुज पाठक, अधिवक्ता
प्रतिवादी/राज्य की ओर से : सुश्री सुप्रिया सिंह, डिप्टी गवर्नमेंट एडवोकेट
केविएटर की ओर से – श्री वी.के. शर्मा

Source – MP High Court

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