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वरिष्ठता और वेतन विवाद पर झटका: ट्राइबल डेवेलपमेंट से स्कूल शिक्षा विभाग में नई नियुक्ति मानी जाएगी – मध्यप्रदेश हाईकोर्ट 

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट 

याचिकाकर्ताओं ने प्राथमिक शिक्षक के पद पर नियुक्ति के लिए स्कूल शिक्षा विभाग तथा ट्राइबल डेवेलपमेंट में संयुक्त विज्ञापन के तहत आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया के दौरान उन्हें ट्राइबल डेवेलपमेंट में पदस्थ कर दिया गया, जबकि उनका मेरिट स्कोर स्कूल शिक्षा विभाग में चयनित अंतिम उम्मीदवार से अधिक था। इसके विरुद्ध उन्होंने पहले भी याचिका (WP No. 28139/2023) दायर की थी, जिसमें डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले Praveen Kumar Kurmi Vs. State of M.P. (Civil Appeal No. 7663/2021) का हवाला देते हुए आदेश दिया था कि याचिकाकर्ताओं को उनकी मेरिट के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग में समायोजित किया जाए।

इस आदेश के अनुपालन में जिला शिक्षा अधिकारी, सागर ने 12-06-2025 को आदेश जारी किया, जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को पहले ट्राइबल डेवेलपमेंट से NOC (अनापत्ति प्रमाणपत्र) या इस्तीफे की पावती देनी होगी। याचिकाकर्ताओं ने इस शर्त को चुनौती नहीं दी और मजबूरीवश इस्तीफा देकर स्कूल शिक्षा विभाग में जॉइनिंग दी।


याचिकाकर्ताओं की मांग

नई याचिका में याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह था कि:

  • उनका इस्तीफा जबरन लिया गया है।
  • उन्हें नए भर्ती कर्मियों की तरह 70% वेतन पर रखा गया है।
  • उनकी वरिष्ठता और पूर्व सेवाओं का लाभ छीन लिया गया है।
    उन्होंने कोर्ट से प्रार्थना की कि उनके इस्तीफे को नजरअंदाज कर उन्हें उस तिथि से स्कूल शिक्षा विभाग में नियुक्त माना जाए जिस तिथि से वे आदिवासी विकास विभाग में पदस्थ हुए थे।

राज्य पक्ष का जवाब

राज्य ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ही आदेश दिनांक 12-06-2025 का पालन करते हुए इस्तीफा दिया है और उसे चुनौती नहीं दी। अतः अब वे अपनी मांग में परिवर्तन नहीं कर सकते।


हाईकोर्ट का विश्लेषण

कोर्ट ने पाया कि:

  • याचिकाकर्ताओं ने पहले WP No. 28139/2023 में राहत प्राप्त की थी और उसी के आधार पर स्कूल शिक्षा विभाग में नियुक्ति मिली।
  • 12-06-2025 के आदेश में स्पष्ट रूप से इस्तीफा/NOC देने की शर्त थी।
  • याचिकाकर्ताओं ने इस शर्त को कभी चुनौती नहीं दी और उसे मानकर इस्तीफा दिया।
  • बाद में उन्होंने नई याचिका दायर कर पूर्व सेवाओं का लाभ मांगना शुरू कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ताओं ने आदेश का पालन कर लिया है, तो वे अब इसके विपरीत दावा नहीं कर सकते।


फैसला

माननीय न्यायमूर्ति मानिंदर एस. भट्टी ने कहा कि:

  • याचिका स्वीकार्य नहीं है क्योंकि याचिकाकर्ताओं ने आदेश की शर्तों को कभी चुनौती नहीं दी।
  • इस्तीफा मान्य है और उन्हें नई नियुक्ति मानी जाएगी।
  • पूर्व सेवाओं के लाभ, वरिष्ठता और पूर्ण वेतन की मांग खारिज की जाती है।

परिणाम: याचिका प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दी गई।

Case Citation

मामला: अमन दुबे व अन्य बनाम मध्यप्रदेश राज्य व अन्य WP 34537/2025
न्यायालय: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
पीठ: माननीय श्री न्यायमूर्ति मानिंदर एस. भट्टी
न्यूट्रल सिटेशन: 2025:MPHC-JBP:45823
निर्णय दिनांक: 12 सितम्बर 2025
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता: श्री कपिल शर्मा
प्रतिवादी राज्य की ओर से अधिवक्ता: श्री गिरीश केकरे

Source – MP High Court

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