सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि धारा 138 एन.आई. एक्ट (Negotiable Instruments Act, 1881) के तहत नोटिस में वही राशि मांगना अनिवार्य है जो चेक में लिखी है। यदि नोटिस में चेक राशि से अलग या अधिक/कम राशि मांगी जाती है, तो पूरा मामला तकनीकी रूप से खारिज किया जा सकता है। इस निर्णय ने चेक बाउंस मामलों में नोटिस की वैधता को लेकर चल रही अस्पष्टता को समाप्त कर दिया है।
मामले के तथ्य
कावेरी प्लास्टिक्स और महदूम बावा के बीच भूमि विक्रय (Land Sale) के संबंध में एक समझौता (MoU) हुआ था।
- आरोपी (महदूम बावा) की कंपनी ने ₹1,00,00,000/- (एक करोड़) का चेक जारी किया।
- चेक “Funds Insufficient” कारण से बाउंस हो गया।
- शिकायतकर्ता ने 08.06.2012 और 14.09.2012 को दो नोटिस भेजे, लेकिन दोनों में चेक राशि ₹2,00,00,000/- (दो करोड़) लिख दी गई।
- आरोपी ने दलील दी कि नोटिस चेक राशि से मेल नहीं खाता, इसलिए धारा 138 के तहत केस अमान्य है।
- ट्रायल कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका स्वीकार कर शिकायत को रद्द कर दिया।
- मामला सुप्रीम कोर्ट में अपील के रूप में आया।
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य प्रश्न
- क्या नोटिस में चेक राशि से भिन्न राशि लिखने पर वह नोटिस वैध माना जा सकता है?
- क्या टाइपिंग/प्रिंटिंग की गलती को “अनदेखा” किया जा सकता है?
- क्या ऐसे मामले में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही जारी रह सकती है?
सुप्रीम कोर्ट की दलीलें
1. ‘Said Amount’ का अर्थ केवल चेक राशि
कोर्ट ने कहा कि प्रावधान (b) धारा 138 में “said amount” का अर्थ वही राशि है जो चेक में लिखी है। नोटिस में मांगी गई राशि चेक से मेल खाना आवश्यक है।
2. नोटिस की वैधता तकनीकी अनुपालन पर निर्भर
कोर्ट ने कहा कि धारा 138 एक तकनीकी अपराध है और इसके प्रत्येक घटक का सख्ती से पालन जरूरी है। यदि नोटिस में राशि गलत लिखी गई है तो वह नोटिस अवैध हो जाएगा और शिकायत टिक नहीं पाएगी।
3. टाइपिंग गलती भी कोई बचाव नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “टाइपोग्राफिकल एरर” (Typographical Error) भी नोटिस को वैध नहीं बना सकती। खासकर जब एक ही गलती दोनों नोटिसों में दोहराई गई हो।
4. पिछले फैसलों पर भरोसा
कोर्ट ने Suman Sethi बनाम Ajay K. Churiwal (2000),
Rahul Builders बनाम Arihant Fertilizers (2008),
और Dashrathbhai Patel (2023) जैसे फैसलों का हवाला दिया, जिनमें कहा गया था कि नोटिस में मांग केवल चेक राशि के लिए होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा:
- चेक राशि से अलग राशि लिखने वाला नोटिस धारा 138 के तहत वैध नहीं है।
- शिकायत तकनीकी रूप से दोषपूर्ण थी, इसलिए उसे खारिज करना सही था।
- टाइपिंग गलती का बहाना स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि कानून का पालन सख्ती से करना आवश्यक है।
कानूनी महत्व (Legal Significance)
यह निर्णय चेक बाउंस मामलों में नोटिस ड्राफ्टिंग के महत्व को और बढ़ा देता है।
- वकीलों और शिकायतकर्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नोटिस में वही राशि लिखी जाए जो चेक में है।
- किसी भी तरह की टाइपिंग या ड्राफ्टिंग गलती पूरे केस को गिरा सकती है।
- इस निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि “नोटिस को पूरा और सही होना चाहिए, अन्यथा धारा 138 लागू नहीं होगी।”
Case Citation
मामला: कावेरी प्लास्टिक्स बनाम महदूम बावा बहुरुद्दीन नूरुल SLP CRL 11184-11185/2025
न्यूट्रल सिटेशन:2025 INSC 1133
निर्णय दिनांक: 19 सितंबर 2025
कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
पीठ:माननीय न्यायमूर्ति बी.आर. गवई (CJI) एवं माननीय न्यायमूर्ति एन.वी. अंजरिया
अपीलकर्ता (कावेरी प्लास्टिक्स) की ओर से: श्री संजय कुमार, अधिवक्ता
प्रतिवादी (महदूम बावा) की ओर से: श्री कुश चतुर्वेदी, अधिवक्ता
Source- Supreme Court Of India
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