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धारा 25 व 26 साक्ष्य अधिनियम के तहत पुलिस के सामने स्वीकारोक्ति अस्वीकार्य – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट में दायर क्रिमिनल अपील नंबर 425/2014 में नागम्मा @ नगरत्ना और अन्य बनाम राज्य कर्नाटक मामला सुनवाई के लिए आया। इस केस में आरोप था कि एक पुलिसकर्मी ने अपने सहकर्मी से 1 लाख रुपये का कर्ज लिया था। बार-बार वसूली की मांग से नाराज होकर कथित रूप से आरोपी की पत्नी, भाई और जीजा ने उस पुलिसकर्मी की हत्या कर दी।

ट्रायल कोर्ट ने धारा 302/34 IPC के तहत आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसे हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसके खिलाफ आरोपी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।


सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ

  1. केवल शव का घर से मिलना पर्याप्त नहीं
    अदालत ने कहा कि केवल आरोपी के घर से शव मिलना दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन पक्ष को पूरी परिस्थितिजन्य श्रृंखला सिद्ध करनी चाहिए।
  2. परिस्थितिजन्य साक्ष्य की पूरी कड़ी न होना
    सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं, कई गवाह hostile हो गए, और मृतक के घर से निकलने या आरोपी के घर जाने का ठोस सबूत नहीं है।
  3. स्वीकारोक्ति का महत्व
    अदालत ने साफ कहा कि पुलिस स्टेशन में की गई स्वीकारोक्ति (Confession) धारा 25 और 26 साक्ष्य अधिनियम के तहत अस्वीकार्य है। यह केवल मजिस्ट्रेट के सामने ही मान्य हो सकती है।
  4. धारा 27 के तहत बरामद हथियार पर टिप्पणी
    बरामद चॉपर (हथियार) को भी अदालत ने निर्णायक सबूत नहीं माना क्योंकि बरामदगी के गवाह भी hostile हो गए थे और हथियार से अपराध का फॉरेंसिक लिंक नहीं जुड़ सका।
  5. मोटिव (उद्देश्य) सिद्ध नहीं हुआ
    अदालत ने पाया कि मृतक की पत्नी और अन्य प्रमुख गवाहों ने कर्ज के लेन-देन को नकार दिया। इस कारण हत्या का मोटिव सिद्ध नहीं हो सका।

सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश

सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने माना कि:

  • परिस्थितिजन्य साक्ष्य की श्रृंखला अधूरी है।
  • अभियोजन पक्ष द्वारा अपराध संदेह से परे सिद्ध नहीं हुआ।
  • आरोपियों को संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) दिया जाना चाहिए।

अदालत ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों के फैसले रद्द कर दिए और सभी आरोपियों को बरी कर दिया। यदि आरोपी जेल में हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया।

Case Citation

मामला: नागम्मा @ नगरत्ना एवं अन्य बनाम राज्य कर्नाटक क्रिमिनल अपील संख्या: 425 / 2014
न्यूट्रल सिटेशन:2025 INSC 1135
निर्णय दिनांक:22 सितंबर 2025
कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया
पीठ:माननीय न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन एवं माननीय न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन

अपीलकर्ताओं (Accused) की ओर से: श्री सी.बी. गुरुराज, वरिष्ठ अधिवक्ता
राज्य कर्नाटक (Respondent) की ओर से: श्री निशांत पाटिल, अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG)

Source- Supreme Court Of India

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