छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर की खंडपीठ (मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु) ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में UAPA, IPC, Arms Act और Explosives Act जैसे गंभीर आरोपों में फंसे आरोपी धनेश राम ध्रुव @ गुरुजी की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि जब किसी आरोपी पर आतंकी गतिविधियों और राज्य विरोधी अपराधों का आरोप हो और अभियोजन की सामग्री prima facie (प्रथम दृष्टया) सही प्रतीत हो, तो जमानत नहीं दी जा सकती।
केस की पृष्ठभूमि
घटना 17 नवंबर 2023 की है, जब विधानसभा चुनाव में मतदान समाप्त होने के बाद सुरक्षा बल के जवान लौट रहे थे। इसी दौरान गढ़ियाबंद जिले के बड़गोंबरा इलाके में आईईडी ब्लास्ट (IED Blast) किया गया। विस्फोट में आईटीबीपी कांस्टेबल जोगेंद्र कुमार गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी मौत हो गई। इस घटना में नक्सलियों की संलिप्तता सामने आई और कई लोगों के खिलाफ IPC की धाराएँ 147, 148, 149, 302, 307, 120B, 121, 121A, साथ ही UAPA की धारा 16, 17, 18, 20, 23, 38, 39, 40, Explosives Substances Act, 1908 की धारा 4, 5, 6 और Arms Act, 1959 की धारा 25 व 27 के तहत अपराध दर्ज किए गए। इन आरोपों में से एक आरोपी था धनेश राम ध्रुव @ गुरुजी, जो पेशे से हेडमास्टर है।
ट्रायल कोर्ट का निर्णय
स्पेशल/NIA कोर्ट, रायपुर ने 21 फरवरी 2025 को धनेश राम ध्रुव की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ उसने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में आपराधिक अपील (CRA No. 655/2025) दायर की।
अपीलकर्ता के तर्क (धनेश राम ध्रुव की ओर से)
अधिवक्ता जितेन्द्र शुक्ला ने निम्न तर्क दिए:
- आरोपी निर्दोष है और घटना से उसका कोई संबंध नहीं।
- वह हेडमास्टर है और परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है।
- घटना के लगभग एक वर्ष बाद उसकी गिरफ्तारी की गई।
- उसके घर से केवल एक बुकलेट और कोविड-19 संबंधी पैम्पलेट मिला, कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई।
- उसे केवल संदेह के आधार पर फंसाया गया है, उसके खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है।
- लंबे समय तक जेल में बंद रहने से परिवार आर्थिक संकट झेल रहा है।
- आरोपी ने अदालत को आश्वासन दिया कि वह जांच और ट्रायल में सहयोग करेगा और ज़मानत मिलने पर किसी भी शर्त का पालन करेगा।
राज्य/NIA के तर्क
NIA की ओर से अधिवक्ता बी. गोपा कुमार और इस्माइल शेख ने तर्क दिया:
- धनेश राम ध्रुव की नक्सली संगठनों से सक्रिय संबद्धता है।
- उसने नक्सलियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट, सामग्री और वित्तीय मदद प्रदान की।
- गवाहों के बयान (धारा 164 CrPC के तहत) में उसके नक्सल बैठकों में शामिल होने और मदद करने की पुष्टि हुई है।
- उसके खिलाफ सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और सह-आरोपियों की जमानत याचिकाएँ पहले ही खारिज हो चुकी हैं।
- मामला गंभीर आतंकवादी गतिविधि से जुड़ा है, इसलिए उसे जमानत नहीं दी जा सकती।
हाईकोर्ट का विश्लेषण
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में UAPA की धारा 43-D(5) का हवाला दिया। यह प्रावधान कहता है कि:
- यदि अभियोजन के आरोप prima facie सही प्रतीत हों तो आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।
- आतंकवाद और राज्य विरोधी गतिविधियों से जुड़े मामलों में जमानत का मानक साधारण अपराधों से कहीं अधिक सख्त है।
न्यायालय ने पाया:
- धनेश राम ध्रुव की नक्सलियों से संबद्धता और संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं।
- गवाहों के बयान और दस्तावेजी सबूत prima facie आरोपों की पुष्टि करते हैं।
- इस तरह के गंभीर अपराध (IED ब्लास्ट, आतंकी गतिविधि, सुरक्षा बलों की हत्या) में केवल “लंबा कारावास” या “परिवारिक कठिनाई” आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (जैसे NIA v. Zahoor Ahmad Shah Watali (2019) 5 SCC 1) का हवाला देते हुए कहा गया कि अदालत को गहन जांच नहीं करनी है, बल्कि यह देखना है कि अभियोजन के आरोप प्रथम दृष्टया सही लगते हैं या नहीं।
अंतिम निर्णय
- हाईकोर्ट ने स्पेशल/NIA कोर्ट के आदेश को सही ठहराया।
- धनेश राम ध्रुव की अपील खारिज कर दी गई।
- आरोपी को जमानत नहीं दी गई और ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया कि 6 माह के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी की जाए।
निष्कर्ष
यह फैसला बताता है कि UAPA और विशेष कानूनों के तहत आरोपित व्यक्तियों के लिए जमानत पाना बेहद कठिन है। अदालतें राष्ट्रीय सुरक्षा और गंभीर आतंकी गतिविधियों के मामलों में “बेल की बजाय जेल” के सिद्धांत पर चलती हैं।
Case Citation
मामला; धनेश राम ध्रुव @ गुरुजी बनाम राज्य छत्तीसगढ़ एवं राष्ट्रीय जांच एजेंसी CRA No. 655/2025
न्यायालय: उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर
पीठ: माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री बिभु दत्त गुरु
न्यायालय का आदेश: UAPA, IPC, Explosives Act व Arms Act के गंभीर आरोपों में जमानत याचिका खारिज।
अधिवक्ता (अपीलकर्ता पक्ष): श्री जितेन्द्र शुक्ला, अधिवक्ता
अधिवक्ता (प्रतिवादी/NIA पक्ष): श्री बी. गोपा कुमार व श्री इस्माइल शेख, अधिवक्ता
Source – High Court Of Chhattisgarh
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