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सिर्फ एक वार, कोई पूर्व नियोजित साजिश नहीं – हत्या धारा 302 का आरोप घटाकर गैर-इरादतन हत्या धारा 304 पार्ट-1 में बदला – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

Hon'ble Mr. Justice Ramesh Sinha (Hon'ble The Chief Justice)

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर की खंडपीठ (मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु) ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में हत्या (IPC धारा 302) की सजा को घटाकर गैर-इरादतन हत्या (IPC धारा 304 पार्ट-1) कर दिया। यह फैसला भारतीय दंड संहिता की धारा 300 के अपवाद 4 (Exception 4 to Section 300 IPC) के प्रावधानों पर आधारित है, जिसमें अचानक झगड़े या आवेग में की गई हत्या को हत्या (Murder) नहीं, बल्कि गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide not amounting to Murder) माना जाता है।


केस की पृष्ठभूमि

  • अपीलकर्ता रामदास लकड़ा, उम्र 32 वर्ष, जिला कोरिया (छत्तीसगढ़) का निवासी था।
  • उसकी पत्नी सुमित्रा के साथ वैवाहिक जीवन में लगातार विवाद चलते थे। गवाहों के अनुसार रामदास शराब पीकर पत्नी से अक्सर झगड़ा करता और मारपीट करता था।
  • घटना 20 मार्च 2017 की रात करीब 9 बजे की है। झगड़े के दौरान रामदास ने अपनी पत्नी सुमित्रा पर तंगी (कुल्हाड़ी जैसी धारदार वस्तु) से वार किया।
  • चोट इतनी गंभीर थी कि सुमित्रा की मौके पर ही मौत हो गई। गले पर गहरा कट था और अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।
  • मौके पर पहुंचे रिश्तेदारों और पड़ोसियों ने देखा कि आरोपी हाथ में खून लगी तंगी लिए खड़ा है।
  • पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण “गले पर गहरा कट, जिससे रक्तस्राव होकर मृत्यु” बताया गया।

ट्रायल कोर्ट का निर्णय

सेशन ट्रायल (ST No. 61/2017) में द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, मनेंद्रगढ़ ने 30 नवंबर 2022 को रामदास लकड़ा को धारा 302 IPC (हत्या) का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास (Life Imprisonment) और ₹500 जुर्माना लगाया।


अपील में आरोपी के तर्क

रामदास लकड़ा ने इस सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में आपराधिक अपील (CRA No. 242/2023) दायर की।
वकील विवेक शर्मा (अपीलकर्ता पक्ष) ने तर्क दिया:

  1. घटना पूर्व नियोजित (Premeditated) नहीं थी।
  2. यह घटना घरेलू विवाद के दौरान अचानक झगड़े से हुई।
  3. आरोपी शराब के नशे में था, जिससे आवेग में वार हुआ।
  4. सिर्फ एक ही वार किया गया, कई बार हमला नहीं किया गया।
  5. हत्या का “इरादा” (Intention) नहीं था, अधिकतम “ज्ञान” (Knowledge) माना जा सकता है।
    इसलिए, इसे Exception 4 to Section 300 IPC के अंतर्गत मानकर धारा 302 को धारा 304 पार्ट-I या पार्ट-II में बदला जाना चाहिए।

राज्य पक्ष के तर्क

राज्य की ओर से नितांश जायसवाल (पैनल लॉयर) ने कहा:

  • आरोपी ने पत्नी की गर्दन पर धारदार हथियार से जानलेवा वार किया।
  • चोट इतनी गहरी थी कि रीढ़ तक कट गई और तुरंत मृत्यु हो गई।
  • वार जानलेवा (Fatal) स्थान पर किया गया था, इसलिए हत्या का इरादा स्पष्ट है।
  • इसलिए सत्र न्यायालय का निर्णय सही है और अपील खारिज की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट का विश्लेषण

न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया, जैसे—

  • Sukhbir Singh v. State of Haryana (2002) 3 SCC 327
  • Arjun v. State of Chhattisgarh (2017) 3 SCC 247
  • Hare Ram Yadav v. State of Bihar (2024 INSC 936)
  • Goverdhan v. State of Chhattisgarh (2025 SCC OnLine SC 69)

न्यायालय ने कहा कि Exception 4 to Section 300 IPC लागू करने के लिए चार शर्तें पूरी होनी चाहिए:

  1. झगड़ा अचानक हुआ हो।
  2. कोई पूर्व नियोजित इरादा न हो।
  3. घटना आवेग या गुस्से में हुई हो।
  4. आरोपी ने न तो अनुचित लाभ (Undue Advantage) उठाया हो और न ही क्रूरता दिखाई हो।

तथ्यात्मक निष्कर्ष

  • घटना घरेलू झगड़े से अचानक भड़की।
  • आरोपी ने केवल एक वार किया।
  • कोई पूर्व योजना या साजिश साबित नहीं हुई।
  • आरोपी शराब के नशे में था।
  • वार घातक था और मृत्यु का कारण बना, इसलिए यह गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide not amounting to Murder) का मामला है।

अंतिम निर्णय

  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय का फैसला आंशिक रूप से बदला।
  • धारा 302 IPC (Murder) की सजा को धारा 304 पार्ट-I IPC (Culpable Homicide not amounting to Murder) में परिवर्तित किया।
  • रामदास लकड़ा को 10 वर्ष का कठोर कारावास (Rigorous Imprisonment) और जुर्माना लगाया गया।

Case Citation

मामला ; रामदास लकड़ा बनाम राज्य छत्तीसगढ़ CRA No. 242/2023
न्यायालय: उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर
पीठ: माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री बिभु दत्त गुरु
न्यायालय का आदेश: धारा 302 IPC से सजा घटाकर धारा 304 पार्ट-I IPC (10 वर्ष कठोर कारावास + जुर्माना)
अधिवक्ता (Appellant पक्ष): श्री विवेक शर्मा, अधिवक्ता
अधिवक्ता (राज्य/प्रतिवादी पक्ष): श्री नितांश जायसवाल, पैनल लॉयर

Source – High Court Of Chhattisgarh

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