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बिना सुनवाई टैक्स निर्धारण असंवैधानिक: दिल्ली हाईकोर्ट

Justice Mini Pushkarna

मामला: गौरव पुंज बनाम नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC)
निर्णय दिनांक: 01 अगस्त 2025
पीठ: माननीय न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा
न्यायालय: दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने गौरव पुंज बनाम नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए NDMC द्वारा बिना पूर्व सूचना और सुनवाई के पारित किए गए संपत्ति कर आकलन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर निर्णय दिया है।

याचिकाकर्ता गौरव पुंज ने अदालत में याचिका दायर कर यह दावा किया था कि NDMC ने 16 जनवरी 2025 को एक आकलन आदेश पारित किया, जिसमें उन्हें ₹85,38,980/- की कर बकाया राशि की मांग की गई। यह आदेश बिना किसी पूर्व सूचना, शो कॉज़ नोटिस या व्यक्तिगत सुनवाई के पारित किया गया, जिससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

पृष्ठभूमि:

याचिकाकर्ता गौरव पुंज ने NDMC द्वारा पारित 16 जनवरी 2025 के मूल्यांकन आदेश (Assessment Order) को चुनौती दी, जिसके तहत उन्हें ₹85,38,980/- की संपत्ति कर की बकाया राशि चुकाने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क यह था कि:

  1. उन्हें न तो कोई पूर्व नोटिस दिया गया और न ही व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर मिला।
  2. आदेश की प्रति भी उन्हें समय पर नहीं मिली, बल्कि बाद में एक अपठनीय प्रति उनके परिसर में पाई गई।
  3. NDMC ने बिना उनका पक्ष सुने ही संपत्ति की Rateable Value (RV) में 5% की वृद्धि कर दी।
  4. याचिकाकर्ता का यह भी आरोप था कि NDMC ने खाली पड़ी संपत्ति पर कर छूट (Section 110, NDMC Act) का लाभ भी नहीं दिया।

NDMC का पक्ष:

NDMC ने कहा कि याचिकाकर्ता के पिता रविंदर प्रकाश पुंज ने 2019 में पुनः मूल्यांकन के लिए आवेदन दिया था और उसी के आधार पर नया मूल्यांकन किया गया। अतः, नोटिस देने की आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने यह भी बताया कि कुल बकाया अब ₹88,19,489/- हो चुका है।

विधिक मुद्दे:

  1. क्या NDMC बिना पूर्व सूचना (notice) दिए और बिना व्यक्तिगत सुनवाई (hearing) के संपत्ति का पुनर्मूल्यांकन कर सकता है?
  2. क्या NDMC द्वारा पारित आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है?

न्यायालय की विधिक टिप्पणियाँ:

  1. प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) के तहत, कोई भी प्रशासनिक या करात्मक कार्यवाही तब तक वैध नहीं मानी जा सकती, जब तक संबंधित पक्ष को सुनवाई का मौका न दिया जाए।
  2. NDMC Act की धारा 72 के तहत, किसी भी कर निर्धारण से पहले करदाता को नोटिस देना अनिवार्य है।
  3. चाहे पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन याचिकाकर्ता के पिता ने ही किया हो, फिर भी NDMC को नवीन आदेश जारी करने से पहले याचिकाकर्ता को नोटिस देना और सुनवाई करनी चाहिए थी।

न्यायालय का निर्णय:

  1. NDMC द्वारा पारित मूल्यांकन आदेश प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियों से युक्त है, क्योंकि ना तो नोटिस जारी किया गया और ना ही याचिकाकर्ता को सुनवाई दी गई।
  2. अदालत ने NDMC को निर्देशित किया कि याचिकाकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई दी जाए और उसके द्वारा प्रस्तुत किए गए सभी दस्तावेजों पर विचार किया जाए।
  3. इस दौरान याचिकाकर्ता को ₹40,00,000/- की अंतरिम राशि 4 सप्ताह के भीतर NDMC को “बिना पक्षपात के अधिकार” के रूप में जमा करनी होगी।
  4. NDMC को पुनः मूल्यांकन कर आवश्यक संशोधन करने का आदेश दिया गया है।

न्यायिक महत्व:

यह निर्णय स्पष्ट रूप से बताता है कि प्रशासनिक सुविधाओं या एकतरफा कार्रवाइयों के नाम पर कानूनी प्रक्रियाओं और न्यायसंगत सिद्धांतों की अनदेखी नहीं की जा सकती। चाहे पुनर्मूल्यांकन अनुरोध खुद ही किया गया हो, तब भी नागरिकों को सूचना और सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।

Source- High Court Of Delhi

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