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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मुआवज़ा आदेश रद्द किया, अकेली खड़ी ट्रॉली को ‘मोटर व्हीकल’ मानने से किया इंकार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, ग्वालियर पीठ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि यदि सड़क पर अकेली खड़ी ट्रॉली किसी दुर्घटना का कारण बनती है, तो उसे मोटर व्हीकल (Motor Vehicle) की परिभाषा में शामिल नहीं किया जा सकता। इस फैसले ने मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act, 1988) की धारा 2(28) की व्याख्या को नई दिशा दी है।

मामला पप्पू उर्फ लेखराज रघुवंशी बनाम कालूराम उर्फ कल्याण सिंह एवं अन्य (Misc. Appeal No.1154/2025) से जुड़ा था, जिसमें ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए मुआवज़े के आदेश को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया।


तथ्यात्मक पृष्ठभूमि

घटना 18 अक्टूबर 2017 की है। मृतक पवन अहिरवार अपनी मोटरसाइकिल से जा रहा था। गांव पथरिया स्थित पेट्रोल पंप के पास आरोपी ने अपनी ट्रॉली सड़क किनारे बिना हेडलाइट, संकेतक या रेडियम काटर लगाए खड़ी कर दी थी। अंधेरे में मृतक की मोटरसाइकिल ट्रॉली से टकरा गई, जिससे उसकी मौत हो गई।

मृतक के परिजनों ने मोटर दुर्घटना दावा प्राधिकरण (MACT), सिरोंज, जिला विदिशा में मुआवज़े की याचिका दायर की। MACT ने सुनवाई के बाद ₹12,30,700/- मुआवज़ा मृतक के परिजनों के पक्ष में स्वीकृत किया।


अपीलकर्ता की दलील

आरोपी पप्पू उर्फ लेखराज रघुवंशी ने हाईकोर्ट में अपील दायर करते हुए कहा:

  1. दुर्घटना के समय ट्रॉली किसी ट्रैक्टर से जुड़ी नहीं थी।
  2. सड़क पर अकेली खड़ी ट्रॉली मोटर वाहन की परिभाषा (धारा 2(28), मोटर व्हीकल एक्ट) में नहीं आती।
  3. इसलिए MACT का दिया गया मुआवज़े का आदेश कानूनन असंगत और अवैध है।

प्रतिवादी की दलील

मृतक के परिजनों ने MACT के आदेश का समर्थन करते हुए तर्क दिया कि ट्रॉली लापरवाहीपूर्वक सड़क पर खड़ी की गई थी, जिससे दुर्घटना घटी। इसलिए आरोपी पर जिम्मेदारी तय होना चाहिए और मुआवज़ा दिया जाना चाहिए।


हाईकोर्ट का विचार

माननीय न्यायमूर्ति हिर्देश ने दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों पर विचार करते हुए कहा:

  • FIR (Ex. P-2) और गवाहों के बयान से यह स्पष्ट हुआ कि ट्रॉली दुर्घटना के समय अकेली सड़क किनारे खड़ी थी और किसी मोटर वाहन से जुड़ी नहीं थी।
  • धारा 2(28), मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की परिभाषा के अनुसार मोटर वाहन वही है, जो यांत्रिक शक्ति से सड़क पर चलने के लिए उपयुक्त हो।
  • ट्रॉली स्वयं से चलने वाला वाहन नहीं है, बल्कि इसे खींचने के लिए ट्रैक्टर या अन्य वाहन की आवश्यकता होती है।
  • इसी तरह धारा 2(39) में ‘सेमी-ट्रेलर’ की परिभाषा दी गई है, जो मोटर वाहन से जुड़ने पर ही वाहन की श्रेणी में आता है।

न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि:
👉 यदि ट्रॉली किसी मोटर वाहन से जुड़ी नहीं है, तो उसे मोटर वाहन नहीं माना जा सकता।
👉 इसलिए MACT द्वारा ट्रॉली को मोटर वाहन मानकर मुआवज़ा देने का आदेश गलत और अवैध है।


फैसला

  • हाईकोर्ट ने MACT, सिरोंज द्वारा दिया गया ₹12,30,700/- मुआवज़े का आदेश निरस्त कर दिया
  • अपीलकर्ता (ट्रॉली मालिक) को जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया।
  • अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रॉली अकेली खड़ी होने पर मोटर वाहन अधिनियम के दायरे में नहीं आती

Case Citation

मामला:पप्पू उर्फ लेखराज रघुवंशी बनाम कालूराम उर्फ कल्याण सिंह एवं अन्य MA 1154/2025
न्यायालय: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, ग्वालियर खंडपीठ
पीठ; माननीय न्यायमूर्ति हिरदेश
याचिकाकर्ता की ओर से : श्री प्रकाश चन्द्र चंदिल, अधिवक्ता
अपीलकर्ता (Appellant) की ओर से: श्री अरविन्द सिंह यादव, अधिवक्ता
प्रतिवादी क्रमांक 1 और 2 की ओर से: श्री अनुराज सक्सेना, अधिवक्ता

Source – MP High Court

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