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APEDA कर्मचारियों को मिलेगा पेंशन का हक: दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

APEDA

दिल्ली हाईकोर्ट ने 19 अगस्त 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एग्रीकल्चरल एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) के कर्मचारियों को केंद्रीय सिविल सेवा (CCS) पेंशन नियमों के तहत पेंशनरी लाभ देने का आदेश दिया। यह फैसला उन कर्मचारियों के पक्ष में आया जो 1987 के विज्ञापन के आधार पर नियुक्त हुए थे और जिन्हें विज्ञापन में ही स्पष्ट रूप से ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी सेवानिवृत्ति सुविधाओं का वादा किया गया था।


केस की पृष्ठभूमि

  • वर्ष 1987 में APEDA ने भर्ती विज्ञापन निकाला, जिसमें लिखा गया था कि कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की तरह पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ मिलेंगे।
  • कर्मचारी इस विज्ञापन के भरोसे पर नियुक्त हुए और वर्षों तक सेवा दी।
  • लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें CCS (Pension) Rules, 1972 के तहत मिलने वाले लाभ नहीं दिए गए।
  • इसके बाद कर्मचारियों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने संवैधानिक अधिकार की मांग की।

याचिकाकर्ताओं की दलील

याचिकाकर्ताओं (कर्मचारियों) की तरफ से दलीलें इस प्रकार थीं :

  1. विज्ञापन में पेंशन का स्पष्ट आश्वासन दिया गया था, इसलिए यह कॉन्ट्रैक्चुअल और लीगल राइट बन गया।
  2. CCS (Pension) Rules, 1972 उन सभी कर्मचारियों पर लागू होते हैं जो 31 दिसंबर 2003 तक नियुक्त हुए।
  3. APEDA बाद में बनाए गए अपने नियमों (APEDA Regulations 1994) का सहारा लेकर पेंशन से इनकार नहीं कर सकती, क्योंकि ये नियम रेट्रोस्पेक्टिव (पूर्व प्रभाव से लागू) नहीं हो सकते।
  4. चूँकि कर्मचारी विज्ञापन की शर्तों के आधार पर नियुक्त हुए थे, उन्हें पेंशन से वंचित करना अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

प्रतिवादी (APEDA व केंद्र सरकार) की दलील

APEDA और केंद्र सरकार की तरफ से यह दलील दी गई :

  1. APEDA Regulations 1994 में पेंशन की सुविधा का प्रावधान नहीं है।
  2. वित्त मंत्रालय और EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) की नीतियों के अनुसार, पेंशन के लिए अलग से फंडिंग की अनुमति नहीं है।
  3. APEDA कर्मचारियों के लिए केवल CPF (Contributory Provident Fund) लागू किया गया है, इसलिए CCS पेंशन नियमों का लाभ नहीं दिया जा सकता।
  4. 2000 और 2014 के बीच जारी विभिन्न सरकारी आदेशों में स्पष्ट किया गया कि सरकारी पेंशन स्कीम स्वायत्तशासी संस्थाओं (Autonomous Bodies) पर स्वतः लागू नहीं होगी।

हाईकोर्ट का विश्लेषण

दिल्ली हाईकोर्ट की खंडपीठ (जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला) ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए कहा :

  1. विज्ञापन की शर्तें बाध्यकारी हैं
    • 1987 के विज्ञापन में पेंशन और ग्रेच्युटी का स्पष्ट उल्लेख था।
    • यह कर्मचारियों के लिए कानूनी अधिकार बन गया, जिसे बाद में बदला नहीं जा सकता।
  2. APEDA Regulations 1994 का कोई प्रभाव नहीं
    • ये नियम 1994 में आए, जबकि कर्मचारी पहले ही नियुक्त हो चुके थे।
    • कोई भी नया नियम पूर्व-प्रभाव से (retrospective) लागू नहीं किया जा सकता।
  3. CCS (Pension) Rules लागू होंगे
    • सभी सरकारी कर्मचारी जो 31 दिसंबर 2003 से पहले नियुक्त हुए, वे इन नियमों के दायरे में आते हैं।
    • इसलिए APEDA कर्मचारियों को पेंशनरी लाभ देना अनिवार्य है।
  4. EPFO और अन्य बाधाएं अप्रासंगिक
    • EPFO या वित्त मंत्रालय के आदेश APEDA के विज्ञापन से पहले नियुक्त कर्मचारियों के अधिकार को खत्म नहीं कर सकते।

कोर्ट का निर्णय

दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया :

  • APEDA को सभी याचिकाकर्ताओं को CCS (Pension) Rules, 1972 के अनुसार पेंशनरी लाभ देने होंगे।
  • जो कर्मचारी पहले से PF (Provident Fund) का लाभ ले चुके हैं, अगर सरकार मांगे तो वे उसे वापस कर सकते हैं।
  • सभी देय पेंशनरी लाभ 8 हफ्तों के भीतर जारी किए जाएँ।

Case Citation

प्रवीण गुप्ता एवं अन्य बनाम भारत संघ एवं अन्य W.P.(C) 8679/2018 एवं W.P.(C) 3236/2024
सुनवाई : दिल्ली उच्च न्यायालय
पीठ : माननीय न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर एवं माननीय न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला
याचिकाकर्ताओं की ओर से ;श्री सलमान खुर्शीद, वरिष्ठ अधिवक्ता,एवं अन्य
प्रतिवादियों की ओर से ; श्री मनीष मोहन, CGSC ,श्री जतिन तेवतिया, अधिवक्ता एवं अन्य

Source – High Court Of Delhi

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