मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि दैनिक वेतनभोगी (Daily Rated Employees) जिन्हें बाद में नियमित (Regularized) किया गया है और जिन्होंने 15 वर्ष से अधिक समय तक मासिक वेतन के रूप में सेवाएँ दी हैं, उनकी यह सेवाएँ पेंशन गणना के लिए जोड़ी जाएंगी।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे दैनिक वेतनभोगी जरूर थे, लेकिन उन्हें मासिक वेतन मिलता था और उनका भुगतान कंटिंजेंसी फंड से होता था। इस प्रकार वे “अस्थायी कंटिंजेंसी पेड कर्मचारी” (Temporary Contingency Paid Employee) की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने दलील दी कि म.प्र. वर्क-चार्ज्ड एवं कंटिंजेंसी पेड एम्प्लॉई पेंशन नियम, 1979 के नियम 2(c) के तहत उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए और पेंशन योग्य सेवा में उनकी पूर्व सेवाओं की गिनती होनी चाहिए।
राज्य सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि दैनिक वेतनभोगियों को पेंशन का लाभ नहीं मिल सकता क्योंकि वे किसी स्वीकृत नियमित पद पर नियुक्त नहीं थे। सरकार ने 2023 के संशोधन का हवाला देते हुए कहा कि अब नियम 6(3) के तहत केवल उन्हीं सेवाओं को पेंशन में जोड़ा जा सकता है जो किसी नियमित पेंशन योग्य पद पर की गई हों।
कोर्ट का निर्णय
माननीय न्यायालय ने कहा:
- जिन कर्मचारियों ने 15 साल से अधिक मासिक वेतन पर सेवा की है, उनकी यह अवधि पेंशन गणना में जोड़ी जाएगी।
- यह लाभ केवल पेंशन योग्य सेवा की गिनती के लिए होगा, सीनियरिटी, प्रमोशन या वेतन निर्धारण पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों को “दैनिक वेतनभोगी” कहना पर्याप्त नहीं है; यदि उन्हें मासिक वेतन दिया गया है, तो वे नियम 2(a) के तहत कंटिंजेंसी पेड कर्मचारी माने जाएंगे।
- जिन कर्मचारियों की सेवा 15 साल से कम है, उन्हें यह लाभ फिलहाल नहीं मिलेगा, लेकिन वे 2023 के संशोधन को चुनौती दे सकते हैं।
- राज्य सरकार को 60 दिन के भीतर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए गए।
Case Citation
मामला: राजेन्द्र प्रसाद सोनी बनाम मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य डब्ल्यूपी क्र. 30064/2025
निर्णय दिनांक :तारीख: 27 सितम्बर 2025
न्यायालय: मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
पीठ; माननीय श्री न्यायमूर्ति विवेक जैन
याचिकाकर्ता (Petitioners) की ओर से: श्री एम.पी.एस. रघुवंशी (वरिष्ठ अधिवक्ता)
राज्य की ओर से (Respondent State): श्री वी.पी. तिवारी, शासकीय अधिवक्ता
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