यह मामला हरियाणा के नूंह जिले में 31 जुलाई 2023 को हुई सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित है। इस हिंसा के बाद दर्ज एफआईआर (संख्या 149 और 150) में 43 से अधिक आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें फिरोजपुर झिरका से विधायक मम्मन खान भी शामिल थे। ट्रायल कोर्ट ने मम्मन खान का ट्रायल अलग करने और उनके खिलाफ अलग चार्जशीट दाखिल करने का आदेश दिया था। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस आदेश को बरकरार रखा।
मम्मन खान ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर कहा कि उनका मामला अन्य आरोपियों से अलग नहीं है और अलग ट्रायल अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
केस के तथ्य
- FIR Nos. 149 और 150 (दिनांक 01.08.2023): IPC की धाराओं 148, 149, 153A, 395, 397, 436, 506, 120B आदि के तहत मामला दर्ज।
- आरोप: सामूहिक दंगा, आगजनी, डकैती और साजिश।
- ट्रायल कोर्ट का आदेश (28.08.2024 और 02.09.2024): मम्मन खान के खिलाफ अलग चार्जशीट दाखिल करने और अलग ट्रायल करने का निर्देश।
- हाईकोर्ट का आदेश (12.12.2024): ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराया और संयुक्त सुनवाई की मांग खारिज।
अपीलकर्ता (MLA मम्मन खान) की दलीलें
- उनके खिलाफ लगाए गए आरोप उसी घटना से जुड़े हैं, जिससे अन्य आरोपियों पर मुकदमा चल रहा है।
- CrPC की धारा 223(d) के अनुसार, एक ही लेन-देन से जुड़े सभी आरोपियों का संयुक्त ट्रायल होना चाहिए।
- अलग ट्रायल कराने से गवाहों की पुनः गवाही होगी, जो न्याय में देरी और विरोधाभासी निर्णयों का कारण बनेगा।
- ट्रायल कोर्ट ने बिना नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए suo motu आदेश पारित किया, जो नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
- केवल MLA होने के कारण अलग ट्रायल करना भेदभावपूर्ण है और समानता के अधिकार (Article 14) का उल्लंघन करता है।
राज्य का पक्ष
- अभियोजन ने कहा कि 43 से अधिक आरोपियों के कारण संयुक्त ट्रायल में लगातार देरी हो रही थी।
- अलग ट्रायल से केस का शीघ्र निपटारा संभव है और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देश (Ashwini Kumar Upadhyay केस) के अनुसार विधायकों के मामलों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
- अलग ट्रायल से अपीलकर्ता को कोई वास्तविक पूर्वाग्रह (prejudice) नहीं होगा।
सुप्रीम कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियाँ
- CrPC की धारा 218–223 संयुक्त व पृथक ट्रायल के नियमों को स्पष्ट करती है।
- धारा 223(d): यदि अपराध एक ही लेन-देन का हिस्सा हों तो आरोपियों का संयुक्त ट्रायल किया जाना चाहिए।
- ट्रायल कोर्ट ने केवल MLA होने के आधार पर अलग ट्रायल का आदेश दिया, जो कानूनी रूप से अस्थिर (unsustainable) है।
- अदालत ने कहा कि अभियोजन का मामला एक ही षड्यंत्र और साझा साक्ष्यों पर आधारित है, इसलिए अलग ट्रायल से गवाहों की पुनः परीक्षा होगी, जिससे देरी और परस्पर विरोधी फैसलों का खतरा है।
- सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तेज सुनवाई (Speedy Trial) महत्वपूर्ण है लेकिन इसे निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) की कीमत पर नहीं किया जा सकता।
संविधानिक दृष्टिकोण
- अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार): सभी आरोपी कानून के समक्ष बराबर हैं, MLA को विशेष या भिन्न ट्रायल का लाभ या नुकसान नहीं दिया जा सकता।
- अनुच्छेद 21 (निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार): बिना सुनवाई का अवसर दिए अलग ट्रायल का आदेश देना निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
- ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट दोनों के आदेश रद्द (set aside) किए गए।
- मम्मन खान के खिलाफ अलग चार्जशीट और ट्रायल का आदेश क्वैश (quash) किया गया।
- ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया गया कि वह संयुक्त ट्रायल करे और सभी आरोपियों के मामलों का एक साथ निपटारा करे।
- कोर्ट ने कहा कि यदि देरी का कारण कुछ आरोपी हैं, तो केवल उन्हें अलग किया जा सकता है, न कि नियमित रूप से पेश हो रहे आरोपियों को।
Case Citation
मामला: मम्मन खान बनाम हरियाणा राज्य क्रिमिनल अपील संख्या: 4002-4003/2025
न्यूट्रल सिटेशन:2025 INSC 1113
निर्णय दिनांक: 12-09-2025
कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया,
पीठ:जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन
Source- Supreme Court Of India
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MAMMAN KHAN VS. STATE OF HARYANA – Crl.A. No. 4002/2025 – Diary Number 58851 / 2024 – 12-Sep-2025Download
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