यह मामला POSH Act, 2013 (Prevention of Sexual Harassment of Women at Workplace Act) के अंतर्गत दायर यौन उत्पीड़न शिकायत की समय-सीमा (Limitation Period) से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायत 3+3 महीने की अधिकतम सीमा के बाद दायर की जाती है तो वह समय-सीमा से बाहर (time-barred) मानी जाएगी और खारिज की जा सकती है।
केस के तथ्य
अपीलकर्ता वनीता पट्नायक, कोलकाता स्थित वेस्ट बंगाल नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज़ (NUJS) में फैकल्टी सदस्य थीं। प्रतिवादी डॉ. निर्मल कांति चक्रवर्ती जुलाई 2019 में विश्वविद्यालय के वाइस-चांसलर नियुक्त हुए।
- सितंबर 2019: वाइस-चांसलर ने अपीलकर्ता को अपने ऑफिस बुलाकर डिनर पर चलने का प्रस्ताव दिया और अनुचित तरीके से हाथ छुआ।
- अक्टूबर 2019: पुनः बुलाकर यौन अनुग्रह (sexual favour) की मांग की और धमकी दी।
- अप्रैल 2023: VC ने अपीलकर्ता को रिज़ॉर्ट पर साथ चलने का दबाव डाला, मना करने पर करियर खराब करने की धमकी दी।
- अगस्त 2023: अपीलकर्ता को CFRGS डायरेक्टर पद से हटा दिया गया और UGC फंड के गलत उपयोग की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच आयोग नियुक्त किया गया।
अपीलकर्ता ने 26 दिसंबर 2023 को Local Complaint Committee (LCC) में यौन उत्पीड़न की शिकायत दायर की।
कार्यवाही का इतिहास
- LCC का निर्णय: शिकायत को समय-सीमा से बाहर बताते हुए खारिज कर दिया।
- सिंगल जज, हाईकोर्ट: LCC का आदेश रद्द कर शिकायत की पुनः सुनवाई का आदेश दिया।
- डिवीजन बेंच, हाईकोर्ट: सिंगल जज का आदेश पलटते हुए कहा कि अप्रैल 2023 के बाद कोई यौन उत्पीड़न नहीं हुआ, बाद की घटनाएँ प्रशासनिक निर्णय थीं।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में आया।
सुप्रीम कोर्ट की दलीलें
सुप्रीम कोर्ट ने POSH Act की धारा 2(n) और धारा 3 का विश्लेषण करते हुए कहा कि यौन उत्पीड़न में न केवल अनुचित शारीरिक संपर्क, यौन प्रस्ताव, टिप्पणी आदि आते हैं, बल्कि ऐसा कोई भी व्यवहार जिससे महिला को डर, अपमान या शत्रुतापूर्ण कार्य वातावरण का सामना करना पड़े, वह भी इसमें शामिल है।
धारा 9 POSH Act:
- शिकायत 3 महीने में दायर करनी चाहिए।
- उचित कारण होने पर LCC अधिकतम अगले 3 महीने तक समय बढ़ा सकती है।
- यानी कुल 6 महीने की सीमा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अप्रैल 2023 की घटना अंतिम यौन उत्पीड़न की घटना थी। अगस्त 2023 की घटनाएँ प्रशासनिक कार्रवाई थीं, जो NFCG (National Foundation for Corporate Governance) की रिपोर्ट के आधार पर ली गईं और उनका यौन उत्पीड़न से प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
इसलिए, 26 दिसंबर 2023 को की गई शिकायत समय-सीमा से बाहर थी।
महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ
- कोर्ट ने कहा कि जब शिकायत प्रारंभिक स्तर पर ही समय-सीमा से बाहर हो, तो इसे सीधे खारिज किया जा सकता है।
- अदालत ने स्पष्ट किया कि “continuing wrong” और “recurring wrong” में अंतर है। अप्रैल 2023 की घटना एक पूर्ण घटना थी और बाद की घटनाएँ उसका विस्तार नहीं थीं।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तकनीकी आधार पर शिकायत खारिज है, लेकिन यह घटना VC के Resume/Bio-data में दर्ज रहनी चाहिए ताकि उसका सामाजिक प्रभाव बना रहे।
निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने अपील खारिज कर दी और हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच के आदेश को सही ठहराया।
Case Citation
मामला: वनीता पट्नायक बनाम निर्मल कांति चक्रवर्ती एवं अन्य SLP(C)17936/2025
न्यूट्रल सिटेशन:2025 INSC 1106
निर्णय दिनांक: 12-09-2025
कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया,
पीठ:माननीय न्यायमूर्ति पंकज मित्तल एवं माननीय न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले
अपीलकर्ता की ओर से: सुश्री मीनाक्षी अरोड़ा, वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Counsel)
प्रतिवादी संख्या 1 की ओर से: सुश्री माधवी दिवान, वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Counsel)
Source- Supreme Court Of India
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