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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,1988 वस्तुनिष्ठ प्रश्न | prevention of corruption act,1988 mcq in hindi

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,1988 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
 

Results

#1. कोई लोक सेवक आपराधिक अवचार का अपराध करने वाला कहा जायेगा यदि वह-

#2. निम्नलिखित में से कौन भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अन्तर्गत ‘विशेष न्यायाधीश’ नियुक्त किया जा सकता है?

#3. निम्नांकित में से कौन-सा कथन सत्य है ? कोई लोक सेवक जो आपराधिक अवचार करेगा तो वह दंडित किया जाएगा—

#4. आभ्यासिक अपराधी के लिए दण्ड का उपबंध किया गया है–

#5. रिश्वत देने वाला दण्डनीय होता है

#6. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 8 तथा 9 किसको लागू होती हैं

#7. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत विशेष न्यायाधीशों की नियुक्ति के अधिकार का प्रावधान किया गया है:

#8. एक लोक सेवक ‘एस’ एक व्यक्ति ‘पी’ से उसके नेमी राशन कार्ड आवेदन को समय से प्रकिया में लाने के लिए पाँच हजार रुपये की रकम उसे देने को कहता है, वह है—

#9. लोक सेवक को रिश्वत दिये जाने से संबंधित अपराध के बारे में उपबंध किया गया है-

#10. लोक सेवक द्वारा आपराधिक अवचार का अपराध परिभाषित किया गया है?

#11. ऐसा कोई लोक सेवक जो किसी व्यक्ति से इस आशय से असम्यक् लाभ अभिप्राप्त करता है और किसी लोक कर्त्तव्य का पालन अनुचित रूप से किया जाये तो वह दण्डनीय होगा

#12. अपराधों के दुष्प्रेरण के लिए दण्ड का उपबंध किया गया है–

#13. किसी commercial organization के द्वारा लोक सेवक को रिश्वत देने से संबंधित अपराध के बारे में उपबंध

#14. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की किस धारा ने भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 161 से 165-ए तक की धाराओं को समाप्त कर दिया है?

#15. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के अन्तर्गत कतिपय अपराधों का अभियोजन चलाने हेतु पूर्व स्वीकृति की अनिवार्यता का प्रावधान किस धारा में है?

#16. धारा 7 के अधीन अपराध का गठन हो जायेगा जब लोक सेवक असम्यक् लाभ

#17. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में दण्डनीय अपराधों से सम्बन्धित धाराएं हैं–

#18. यदि कोई व्यक्ति भ्रष्ट या अविधिपूर्ण साधनों द्वारा या निजी प्रभाव का प्रयोग करके किसी लोक सेवक को प्रभावित करके असम्यक् लाभ अभिप्राप्त करेगा तो वह दंडित किया जायेगा?

#19. अभियुक्त मध्यप्रदेश शासन में कार्यरत था, इन आक्षेपों के साथ प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीबद्ध हुई कि वह डॉक्टर अपने घर पर निजी प्रेक्टिस शाम को कर रहा था और निर्धारित फीस के रूप में 100 रुपये प्रति मरीज वसूल कर रहा था, शासकीय निर्देशों के अनुसार शासकीय डॉक्टर मरीजों से उनके निरीक्षण हेतु कोई फीस वसूल नहीं करेंगे, ऐसा माना जाता था। उस डॉक्टर के निवास पर छापा डाला गया और वह निजी प्रेक्टिस करते व परिवादी से 100 रुपये परामर्श शुल्क के रूप में प्राप्त करते पाया गया अभियुक्त अभियोजित किये जाने का उत्तरदायी है–

#20. कोई व्यक्ति पी’ लोक सेवक ‘एस’ को, यह सुनिश्चित करने के लिए दस हजार की रकम देता है कि सभी बोली लगाने वालों में से उसे अनुज्ञप्ति प्रदान की जाए तो ‘पी’—

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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम क्या है ?

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (पीसीए, 1988) भारत में सरकारी एजेंसियों और सार्वजनिक क्षेत्र के व्यवसायों में भ्रष्टाचार का मुकाबला करने के लिए अधिनियमित भारत की संसद का एक अधिनियम है।

पीसीए 1988 इसे बेहतर ढंग से लागू करने के लिए कई संशोधनों से गुजरा है। यह लेख भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेषताओं को उजागर करेगा और लागू किए गए संशोधनों पर भी प्रकाश डालेगा।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेषताएं क्या हैं?

किसी लोक सेवक को भ्रष्ट या अवैध तरीके से प्रभावित करने के लिए परितोषण लेना, कारावास से दंडनीय होगा जो कम से कम तीन वर्ष का होगा लेकिन जो सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के उद्देश्य क्या हैं?

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का उद्देश्य भारत में विभिन्न सरकारी एजेंसियों और सार्वजनिक क्षेत्र के व्यवसायों में भ्रष्टाचार का मुकाबला करके उन्हें कम करना है।
 

2018 संशोधन अधिनियम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • रिश्वत एक विशिष्ट और प्रत्यक्ष अपराध है
  • रिश्वत लेने वाले को 3 से 7 साल की कैद के साथ-साथ जुर्माना भी भरना पड़ेगा
  • रिश्वत देने वालों को 7 साल तक की कैद और जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
  • 2018 का संशोधन उन लोगों की सुरक्षा के लिए एक प्रावधान बनाता है जिन्हें 7 दिनों के भीतर कानून प्रवर्तन एजेंसियों को मामले की सूचना दिए जाने की स्थिति में रिश्वत देने के लिए मजबूर किया गया है।
  • यह आपराधिक कदाचार को फिर से परिभाषित करता है और अब केवल संपत्ति के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति के कब्जे को कवर करेगा।
  • यह केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी जांच एजेंसियों के लिए उनके खिलाफ जांच करने से पहले एक सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमोदन लेने के लिए अनिवार्य बनाकर अभियोजन से सेवानिवृत्त लोगों सहित सरकारी कर्मचारियों के लिए एक ‘ढाल’ का प्रस्ताव करता है।
  • हालांकि, इसमें कहा गया है कि किसी व्यक्ति को अपने लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए किसी भी अनुचित लाभ को स्वीकार करने या स्वीकार करने का प्रयास करने के आरोप में मौके पर ही गिरफ्तारी से जुड़े मामलों के लिए ऐसी अनुमति आवश्यक नहीं होगी।
  • लोक सेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में, “अनुचित लाभ” का कारक स्थापित करना होगा।
  • रिश्वत के आदान-प्रदान और भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों में सुनवाई दो साल के भीतर पूरी की जानी चाहिए। इसके अलावा, उचित देरी के बाद भी, परीक्षण चार साल से अधिक नहीं हो सकता।
  • इसमें रिश्वत देने वाले वाणिज्यिक संगठनों को सजा या अभियोजन के लिए उत्तरदायी होना शामिल है। हालांकि, धर्मार्थ संस्थानों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।
  • यह भ्रष्टाचार के आरोपी लोक सेवक की संपत्ति की कुर्की और जब्ती के लिए शक्तियां और प्रक्रियाएं प्रदान करता है।

THE PREVENTION OF CORRUPTION ACT, 1988 mcq in hindi

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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,1988 mcq in hindi

 

 

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