नई दिल्ली/जबलपुर, 24 सितंबर 2025 – ओबीसी आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामलों की आज सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से उचित तैयारी न होने पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा हाईकोर्ट से ट्रांसफर किए गए 60 से अधिक प्रकरणों में से आज कुल 11 मामले (9 ट्रांसफर याचिकाएं और 2 रिट याचिकाएं) सूचीबद्ध थे। इन मामलों को जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा एवं जस्टिस अतुल कुमार चंदोकर की खंडपीठ के समक्ष शीर्ष पर सुनवाई हेतु रखा गया था।
सरकार की तैयारी पर कोर्ट की नाराजगी
जैसे ही मामले कॉल हुए, राज्य सरकार की ओर से दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय माँगा गया। कोर्ट ने कहा कि यह प्रकरण अर्जेंट नेचर के हैं, अतः बहस आज ही होनी चाहिए।
अनारक्षित वर्ग की ओर से पेश हुई अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार ने मात्र एक दिन पहले लगभग 15,000 पन्नों के दस्तावेज गूगल ड्राइव में उपलब्ध कराए हैं, जिनका अध्ययन करना संभव नहीं था। इस पर कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की –
“शायद आप लोग इन मामलों को मज़ाक बना रहे हैं।”
वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर
सरकार की ओर से अधिवक्ताओं की स्थिति
राज्य सरकार की ओर से नियुक्त अधिवक्ता पी. विलसन ने कहा कि वे बहस के लिए तैयार हैं, लेकिन अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटारमणी ने फाइनल बहस करने से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि वे रेस्पोंडेंट के रूप में पेश हैं और आरक्षण का विरोध कर रहे हैं।
इस स्थिति को संभालते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार ओबीसी आरक्षण का समर्थन कर रही है।
कोर्ट का स्पष्ट रुख : कोई अंतरिम आदेश नहीं
विशेष अधिवक्ताओं को बहस करने का मौका दिए बिना कोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया कि लिखित बहस प्रस्तुत करें। सरकार ने इसके लिए 15 दिन का समय माँगा, किंतु सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि अगली सुनवाई 8 अक्टूबर 2025 को होगी और उसी दिन मामलों का परीक्षण होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि “हम कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं करेंगे, बल्कि याचिकाओं का अंतिम निस्तारण करेंगे।”
ओबीसी एवं अन्य पक्षकारों की दलीलें
ओबीसी वर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, वरुण ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह और उदय कुमार साहू ने पैरवी की।
उन्होंने कहा कि –
- कुछ याचिकाओं में केवल EWS आरक्षण को चुनौती दी गई है,
- कुछ में ऑर्डिनेंस को चुनौती है,
- जबकि कुछ याचिकाओं में कानून को ही चुनौती दी गई है।
इनमें से केवल कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई होना चाहिए, बाकी खारिज की जानी चाहिए। कोर्ट ने इस पर कहा कि सभी मामलों का परीक्षण 8 अक्टूबर को किया जाएगा।
सरकार के पास विकल्प : होल्ड पदों पर सशर्त नियुक्ति
कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि मध्य प्रदेश सरकार चाहे तो होल्ड पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है, लेकिन नियुक्ति पत्र में यह स्पष्ट शर्त अंकित करनी होगी कि –
- यह नियुक्तियाँ याचिकाओं के अंतिम निर्णय पर निर्भर रहेंगी।
- यदि अंतिम फैसला ओबीसी आरक्षण के खिलाफ आता है तो इन नियुक्तियों को ओबीसी के रिक्त पदों के विरुद्ध समायोजित किया जाएगा।
Source – OBC Advocates Welfare Association
- Order 2 Rule 1 CPC | Frame of suit
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